यशवंत गंजीर, कुरूद। महानदी से रेत और नगर के तालाबों से कथित मुरुम उत्खनन को लेकर क्षेत्रवासियों में नाराजगी बढ़ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि ओवरलोड हाइवा की लगातार आवाजाही से पर्यावरण प्रभावित हो रहा है और धूल के कारण राहगीरों व विद्यार्थियों का सड़क पर चलना मुश्किल हो गया है। उनका कहना है कि शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है।
ग्रामीणों के अनुसार, कुरूद-दोनर और मेघा-राजिम मार्ग पर रेत से भरे भारी वाहन तेज रफ्तार में दौड़ते हैं। सड़क निर्माण कार्य के बीच उड़ती धूल से दुर्घटना का खतरा बढ़ गया है। इस मार्ग से केंद्रीय विद्यालय, कृषि महाविद्यालय, संत गुरु घासीदास स्नातकोत्तर महाविद्यालय, आईटीआई सहित अन्य शिक्षण संस्थानों के छात्र-छात्राओं का रोजाना आवागमन होता है, जिन्हें धूल और भारी वाहनों के बीच सफर करना पड़ रहा है।
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि प्रतिबंध के बावजूद सेलदीप, जोरातराई और दोनर क्षेत्र में महानदी से रेत का उत्खनन जारी है। वहीं नगर के एक तालाब से मुरुम उत्खनन और केनाल रोड से उसके परिवहन पर भी लोगों ने आपत्ति जताई है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, पुलिस, परिवहन और खनिज विभाग से ओवरलोड वाहनों पर सख्त कार्रवाई, सड़कों पर नियमित पानी का छिड़काव, शिक्षण संस्थानों के आसपास गति सीमा का पालन सुनिश्चित कराने तथा अवैध उत्खनन की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

