बलरामपुर शिक्षा विभाग में कथित वित्तीय अनियमितता का मामला अब तूल पकड़ता नजर आ रहा है। जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव पर करीब 4 करोड़ 51 लाख रुपये की राशि से जुड़ी कथित गड़बड़ी और नियम विरुद्ध खरीदी के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले की शिकायत के बाद जिला कलेक्टर ने जांच टीम गठित कर जांच कराई। दावा है कि जांच में शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि हुई है और जांच टीम ने संबंधित अधिकारी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई के साथ बैंक खाते पर होल्ड लगाने की अनुशंसा की है।
मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। वहीं अब यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि इतनी बड़ी राशि से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितता में क्या सिर्फ जिला शिक्षा अधिकारी की भूमिका थी या विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी इसकी प्रक्रिया में शामिल थे?

अधिवक्ता की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
जानकारी के मुताबिक वाड्रफनगर के अधिवक्ता अभिषेक यादव ने जिला कलेक्टर से शिकायत कर शिक्षा विभाग में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच की मांग की थी। शिकायत में विभिन्न योजनाओं और खरीदी प्रक्रियाओं में नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था।
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिला कलेक्टर की ओर से जांच टीम गठित की गई। जांच के दौरान विभागीय रिकॉर्ड, खरीदी प्रक्रिया और संबंधित दस्तावेजों की जांच किए जाने की बात सामने आई है।
सरस्वती साइकिल योजना से लेकर स्टेशनरी खरीदी तक सवाल
आरोपों का दायरा केवल एक खरीदी तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। सरस्वती साइकिल योजना, पाठ्य पुस्तक खरीदी, फर्नीचर खरीदी और स्टेशनरी खरीदी सहित विभिन्न मदों में कथित अनियमितता के आरोप लगाए गए हैं।
सवाल यह है कि इन सभी खरीदी प्रक्रियाओं में निर्धारित नियमों का पालन किया गया था या नहीं? खरीदी के लिए निविदा, दर निर्धारण, आपूर्ति, बिल भुगतान और सामग्री की वास्तविक उपलब्धता जैसे बिंदुओं की जांच कितनी गहराई से हुई? यही वे सवाल हैं, जिनका जवाब जांच के बाद सामने आना बाकी है।

जांच रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि का दावा
शिकायत के बाद गठित जांच टीम ने मामले की जांच की। शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से दावा किया जा रहा है कि जांच में लगाए गए आरोपों की पुष्टि हुई है। इसके बाद जांच टीम ने जिला शिक्षा अधिकारी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई और बैंक खाते पर होल्ड लगाने की अनुशंसा की है।
यदि जांच रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि हुई है, तो अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सवाल कार्रवाई को लेकर है। क्या अनुशंसा के आधार पर तत्काल विभागीय कार्रवाई होगी या मामले की आगे भी विस्तृत जांच कराई जाएगी?

जांच के बाद शिक्षा मंत्री के पिता के पैरों में गिरने का फोटो चर्चा में
मामले के बीच एक वायरल फोटो भी चर्चा में है, जिसमें जांच के बाद जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव को शिक्षा मंत्री के पिता के पैरों में झुकते हुए देखा जा रहा है। हालांकि इस दृश्य की पूरी परिस्थितियां और इसके पीछे का संदर्भ स्वतंत्र रूप से स्पष्ट होना अभी बाकी है।
इस दृश्य के सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में भी तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। वहीं मामले की निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग करने वाले लोग चाहते हैं कि किसी भी दबाव के बिना जांच रिपोर्ट के आधार पर निर्णय लिया जाए

सत्ता में पहुंच का दावा, अब कार्रवाई की बारी?
जिला शिक्षा अधिकारी को लेकर स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि उनकी राजनीतिक और सत्ता के गलियारों में मजबूत पहुंच बताई जाती रही है। हालांकि इस तरह के दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई होगी या मामला फिर किसी नए मोड़ पर पहुंच जाएगा? शिकायतकर्ता और स्थानीय लोगों की नजर अब प्रशासन के अगले कदम पर है।

क्या अकेले डीईओ ने की वित्तीय अनियमितता?
करीब 4 करोड़ 51 लाख रुपये की कथित वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आने के बाद दूसरा बड़ा सवाल यह है कि क्या इतनी बड़ी राशि से जुड़ी पूरी प्रक्रिया किसी एक अधिकारी के स्तर पर ही संभव थी?
यदि खरीदी प्रक्रिया में कई स्तरों पर स्वीकृति, भुगतान, सत्यापन और सामग्री प्राप्ति की प्रक्रिया शामिल रही है, तो जांच का दायरा केवल एक अधिकारी तक सीमित रहने के बजाय पूरी प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका तक पहुंचना चाहिए।

प्रभारी मंत्री ने दिया कार्रवाई का आश्वासन
मामले को लेकर प्रभारी मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कार्रवाई का आश्वासन दिया है। ऐसे में अब प्रशासनिक कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं। यदि जांच रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि हुई है, तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की मांग उठ रही है।
फिलहाल मामला गंभीर आरोपों और जांच रिपोर्ट के दावों के बीच है। जिला शिक्षा अधिकारी मनीराम यादव का पक्ष और जांच रिपोर्ट की आधिकारिक प्रति सार्वजनिक होने के बाद ही आरोपों की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में किस स्तर तक जांच आगे बढ़ाता है और क्या केवल जिला शिक्षा अधिकारी पर कार्रवाई होती है या कथित वित्तीय अनियमितता से जुड़े अन्य जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी सामने आती है।


