चंदौली। सरकार द्वारा जनता की शिकायतों के त्वरित और पारदर्शी निस्तारण के लिए संचालित IGRS (इंटीग्रेटेड ग्रीवांस रिड्रेसल सिस्टम) की प्रभावशीलता एक बार फिर सवालों के घेरे में है। नियामताबाद विकास खंड के हिलौनी गांव निवासी शिकायतकर्ता द्वारा पंचायत विभाग के एक कर्मचारी के संदर्भ में IGRS पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई थी। मामले की जांच ग्राम विकास अधिकारी आलोक कुमार को सौंपी गई लेकिन उनकी जांच आख्या ने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।
जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में उल्लेख किया कि शिकायतकर्ता का निवास स्थान नहीं मिला तथा संपर्क नहीं हो सका। जबकि IGRS पोर्टल पर शिकायत दर्ज करते समय शिकायतकर्ता का मोबाइल नंबर अनिवार्य रूप से दर्ज होता है। सामान्यतः जांच अधिकारी शिकायतकर्ता से फोन पर संपर्क कर शिकायत के तथ्यों की पुष्टि करते हैं और उसके बाद रिपोर्ट प्रस्तुत करते हैं।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या जांच अधिकारी ने वास्तव में शिकायतकर्ता से संपर्क करने का प्रयास किया था या केवल औपचारिकता निभाते हुए रिपोर्ट लगा दी गई? यदि शिकायतकर्ता से संपर्क किए बिना ही रिपोर्ट लगा दी जाती है तो फिर IGRS जैसी महत्वाकांक्षी जनशिकायत प्रणाली का उद्देश्य कैसे पूरा होगा?
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस प्रकार की जांच रिपोर्टें न केवल शिकायतकर्ताओं का विश्वास कमजोर करती हैं बल्कि शासन की जनसुनवाई व्यवस्था को भी निष्प्रभावी बनाने का काम करती हैं। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले का संज्ञान लेते हैं या फिर शिकायतें इसी तरह फाइलों में दबकर रह जाएंगी।

