अमेठी। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर जहां एक ओर मां के मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है, वहीं प्रशासन भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पूरी तरह मुस्तैद है। अमेठी से करीब 12 किलोमीटर दूर संग्रामपुर स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ कालिकन धाम मंदिर में इन दिनों आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह स्थल महर्षि च्यवन मुनि की तपोस्थली रहा है। कथा के मुताबिक, अयोध्या के राजा राजा सरयाज की पुत्री सुकन्या द्वारा अनजाने में मुनि की तपस्या भंग होने पर श्राप मिला था, जिसे बाद में प्रायश्चित और सेवा से शांत किया गया। इसी स्थान पर देव वैद्य अश्विनी कुमार द्वारा स्थापित पवित्र कुण्ड में स्नान से मुनि पुनः स्वस्थ और युवा हुए। मान्यता है कि इसके बाद ब्रह्मा जी के आह्वान पर मां आदि शक्ति यहां विराजमान हुईं और तब से यह स्थान मनोकामना पूर्ण करने वाले सिद्धपीठ के रूप में प्रसिद्ध हो गया।
नवरात्रि के दौरान यहां दूर-दराज से हजारों श्रद्धालु मां कालिका के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। भक्तों का विश्वास है कि सच्चे मन से की गई पूजा कभी व्यर्थ नहीं जाती और मां सभी की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।
इसी बीच सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने पहुंचे पुलिस अधीक्षक सरवणन टी ने मंदिर परिसर में पूजा-अर्चना करने के बाद सीसीटीवी कैमरों, पुलिस बल की तैनाती, बैरिकेडिंग और भीड़ नियंत्रण व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने मेला क्षेत्र में स्थापित पुलिस बूथ का भी निरीक्षण कर कर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
एसपी ने बताया कि मेले में पर्याप्त पुलिस बल, एंटी रोमियो टीम और फायर ब्रिगेड की तैनाती की गई है, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित और सुव्यवस्थित वातावरण मिल सके।
वहीं पीठाधीश्वर ने बताया कि मां कालिका की डोली आगमन सुख, शांति और समृद्धि का प्रतीक है और श्रद्धालुओं से विधि-विधान से पूजन करने की अपील की।
आस्था का सैलाब और सुरक्षा का घेरा: नवरात्रि पर कालिकन धाम में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, एसपी ने संभाली कमान
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