(मनमोहन)
चंदौली। जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट सभागार में मंगलवार को आयोजित दिशा (DISHA) समिति की बैठक विकास योजनाओं की समीक्षा से अधिक मीडिया की एंट्री पर रोक को लेकर चर्चा में रही। बैठक की अध्यक्षता चंदौली सांसद एवं दिशा समिति के अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह ने की, जबकि जिले के जनप्रतिनिधि और अधिकारी इसमें शामिल हुए। लेकिन इस बार सबसे ज्यादा चर्चा बैठक की कार्यवाही नहीं, बल्कि मीडिया को बाहर रखने के फैसले की रही।
जानकारों के अनुसार पिछली दिशा बैठक में विभिन्न जनप्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस और आरोप-प्रत्यारोप हुए थे, जिसकी खबरें प्रमुखता से सामने आई थीं। इस बार बैठक शुरू होने से पहले ही मीडिया की एंट्री पर रोक लगा दी गई। ऐसे में सवाल उठने लगे कि क्या इस बार विवादों को सुर्खियां बनने से रोकने की कोशिश की गई।
विडंबना यह है कि दिशा समिति का उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकार की विकास योजनाओं की निगरानी, समीक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। लेकिन जिस बैठक में जनता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होनी थी, वहां जनता तक जानकारी पहुंचाने वाले मीडिया प्रतिनिधियों को ही बाहर रखा गया। इसे लेकर पत्रकारों और आम लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली।
इस दौरान एक और दिलचस्प पहलू यह भी रहा कि पिछली बैठकों में विभिन्न मुद्दों पर आमने-सामने नजर आने वाले सत्ता पक्ष और विपक्ष के जनप्रतिनिधि इस बार मीडिया को बाहर रखने के मुद्दे पर एकमत दिखाई दिए। राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं।
बैठक समाप्त होने के बाद एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। मीडिया को बैठक से बाहर रखने के विरोध में पत्रकारों ने दिशा समिति के अध्यक्ष एवं सांसद वीरेंद्र सिंह का बहिष्कार कर दिया। बैठक खत्म होने के बाद जब सांसद बाहर निकले तो पत्रकारों ने उनसे कोई सवाल नहीं पूछा और न ही उनकी प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया। इसे मीडिया की ओर से अपने विरोध दर्ज कराने के रूप में देखा गया।
कलेक्ट्रेट परिसर में भारी पुलिस बल की मौजूदगी के बीच संपन्न हुई इस बैठक ने विकास योजनाओं से ज्यादा अपनी गोपनीयता को लेकर सुर्खियां बटोरीं। जनता के बीच अब चर्चा इस बात की है कि आखिर ऐसा क्या था जिसे कैमरों और कलमों से दूर रखना जरूरी समझा गया।
सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम है—क्या दिशा की बैठक में विकास की दिशा तय हुई या फिर सवालों की एंट्री पर ही “नो-एंट्री” का बोर्ड लगा दिया गया? जनता पारदर्शिता चाहती है और यह जानना चाहती है कि उसके हितों से जुड़े मुद्दों पर हुई चर्चा को सार्वजनिक करने से आखिर परहेज क्यों किया गया। विकास योजनाओं की निगरानी के लिए बनी समिति की बैठक में पारदर्शिता पर उठे ये सवाल फिलहाल चर्चा का विषय बने हुए हैं।

