सामूहिक धर्मांतरण पर उम्रकैद, 25 लाख का भारी जुर्माना
इस कानून की सबसे सख्त मार सामूहिक धर्मांतरण (Mass Conversion) कराने वालों पर पड़ेगी। नए प्रावधानों के मुताबिक, यदि दो या दो से अधिक व्यक्तियों का अवैध रूप से धर्मांतरण कराया जाता है, तो दोषियों को 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है। इसके साथ ही, कम से कम ₹25 लाख का जुर्माना भी भरना होगा। आप समझ सकते हैं कि यह कानून केवल कागजी नहीं है; यह सीधे उन सिंडिकेट्स पर प्रहार है जो प्रलोभन के जरिए सामाजिक ताने-बाने को रणनीतिक रूप से बदलने की कोशिश करते हैं।
महिलाओं और SC/ST के लिए विशेष सुरक्षा कवच
अगर पीड़ित महिला, नाबालिग, मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति या अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) समुदाय से है, तो सजा और भी कड़ी होगी। इस श्रेणी में दोषियों को 10 से 20 वर्ष की जेल और न्यूनतम ₹10 लाख के जुर्माने की सजा दी जाएगी। इसके अलावा, अवैध धर्मांतरण के पीड़ितों को ₹10 लाख तक का मुआवजा भी दिलाया जाएगा, जिसे सीधे दोषी व्यक्ति से वसूला जाएगा। यह छत्तीसगढ़ को देश के सबसे सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून वाले राज्यों की कतार में खड़ा करता है।
“यह कानून हमारी सांस्कृतिक पहचान बचाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। अब कोई भी प्रलोभन या दबाव के दम पर भोले-भाले आदिवासियों और गरीबों का धर्मांतरण नहीं कर पाएगा। हमने सिस्टम को पूरी तरह से पारदर्शी और सख्त बना दिया है।”
— विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़
इस कानून के लागू होने के बाद अब धर्मांतरण की प्रक्रिया बेहद जटिल हो गई है। धर्मांतरण करने वाले व्यक्ति और धर्मांतरण कराने वाले धर्मगुरु, दोनों को 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट (DM) को घोषणा पत्र देना होगा। यदि कोई केवल शादी के उद्देश्य से धर्मांतरण करता है, तो ऐसी शादी को अवैध घोषित कर दिया जाएगा। आने वाले हफ्तों में, जिला प्रशासन द्वारा विशेष अदालतों के गठन और नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया तेज होगी। यह कानून न केवल कानूनी बल्कि छत्तीसगढ़ की सामाजिक और राजनीतिक दिशा को भी रणनीतिक रूप से बदलने वाला साबित होगा।

