धमतरी। नगर पंचायत आमदी इन दिनों सियासी टकराव का सबसे बड़ा केंद्र बन गई है, जहां सत्ता और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं। एक तरफ नेता प्रतिपक्ष पर 55 हजार रुपये लेकर भवन अनुज्ञा देने का आरोप लगा है, तो दूसरी तरफ उन्हीं पर आरोप लगाने वाले जनप्रतिनिधियों के खिलाफ जातिसूचक गाली-गलौज और धमकी देने की शिकायत थाने तक पहुंच गई है। मामला अब प्रशासनिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर गरमा गया है।
‘पैसे दो, परमिशन लो’—भ्रष्टाचार का बड़ा आरोप:
नगर पंचायत अध्यक्ष ज्योति साहू के नेतृत्व में भाजपा पार्षदों ने कलेक्टर अबिनाश मिश्रा को ज्ञापन सौंपकर कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष ऋषभ ठाकुर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत के मुताबिक, वार्ड क्रमांक 9 के निवासी से भवन अनुज्ञा के बदले 55 हजार रुपये नकद लिए गए और इसके बाद 11 मार्च 2026 को अनुमति जारी की गई। भाजपा नेताओं ने इसे सीधा-सीधा भ्रष्टाचार बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
नेता प्रतिपक्ष का पलटवार—“साजिश, सबूत लाओ”
आरोपों से घिरे ऋषभ ठाकुर ने पूरे मामले को राजनीतिक षड्यंत्र करार दिया है। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी तरह का लेन-देन नहीं हुआ है और आरोप लगाने वाले यदि गंभीर हैं तो ठोस प्रमाण पेश करें। उनका कहना है कि यह उनकी छवि खराब करने की सोची-समझी कोशिश है।
अब जातिगत अपमान का संगीन आरोप:
विवाद ने नया मोड़ तब लिया जब ऋषभ ठाकुर ने अजाक थाना धमतरी में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने अध्यक्ष ज्योति साहू, उपाध्यक्ष कोमल यादव और पार्षद सुनीता साहू पर आरोप लगाया कि 13 अप्रैल की बैठक के दौरान और बाद में उन्हें अपमानित किया गया, जातिसूचक गालियां दी गईं और सवाल उठाने से रोका गया।
धमकी, दबाव और ‘विकास रोकने’ की चेतावनी:
शिकायत में यह भी कहा गया है कि विरोध करने पर उन्हें झूठे मामलों में फंसाने और उनके वार्ड के विकास कार्य रोकने की धमकी दी गई। 17 अप्रैल को भी उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किए जाने का आरोप लगाया गया है।
‘यह सिर्फ मेरा नहीं, समाज का अपमान’:
ऋषभ ठाकुर ने खुद को आदिवासी जनप्रतिनिधि बताते हुए कहा कि यह घटना पूरे आदिवासी समाज का अपमान है। उन्होंने मुख्यमंत्री, गृह मंत्री, कलेक्टर और राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग से निष्पक्ष जांच और दोषियों पर तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
अब सवाल प्रशासन पर:
एक ही प्रकरण में भ्रष्टाचार और जातीय उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोपों ने आमदी की राजनीति को उबाल पर ला दिया है। अब सबकी नजर प्रशासन पर टिकी है—क्या पहले भ्रष्टाचार की जांच होगी या जातीय उत्पीड़न के आरोपों पर सख्त कानूनी कार्रवाई?
आमदी की सियासत में उठी यह चिंगारी अब बड़ा राजनीतिक तूफान बन सकती है।

