रायपुर: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में आज का दिन निर्णायक साबित होने वाला है। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (J) के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी की उम्रकैद की सजा पर आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होनी है।
साल 2003 में हुई एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की हत्या के मामले में निचली अदालत ने 2007 में अमित जोगी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था। हालांकि, अन्य 27 आरोपियों को सजा सुनाई गई थी। इस फैसले के खिलाफ जग्गी परिवार ने हाईकोर्ट में अपील की थी।
बीती 2 अप्रैल 2026 को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए अमित जोगी को इस हत्याकांड का मुख्य साजिशकर्ता माना और उन्हें आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई। कोर्ट ने टिपणी की थी कि साक्ष्यों से यह स्पष्ट है कि साजिश में उनकी सक्रिय भूमिका थी। सजा सुनाने के साथ ही कोर्ट ने उन्हें 3 सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया था।
हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर की है। आज की सुनवाई में मुख्य रूप से दो पहलुओं पर नजर रहेगी:
स्टे (Stay): क्या सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के फैसले और सजा पर अंतरिम रोक लगाएगा?
सरेंडर की मियाद: हाईकोर्ट द्वारा दी गई 3 हफ्ते की समय सीमा समाप्त होने वाली है। यदि आज राहत नहीं मिली, तो अमित जोगी को तत्काल आत्मसमर्पण करना होगा।
छत्तीसगढ़ की राजनीति में इस फैसले का बड़ा असर देखने को मिल सकता है। अमित जोगी वर्तमान में अपनी पार्टी के मुख्य चेहरा हैं। यदि उन्हें जेल जाना पड़ता है, तो आगामी राजनीतिक समीकरणों में बड़े बदलाव की संभावना है।

