यशवंत गंजीर धमतरी। कुरुद और भखारा क्षेत्र के शीतला मंदिरों में हुई सिलसिलेवार चोरियों ने पुलिस महकमे के भीतर एक बड़े संगठित गिरोह की सक्रियता का अंदेशा जता दिया है। इन घटनाओं के पीछे किसी सामान्य चोर का हाथ न होकर, एक सोची-समझी साजिश और सुनियोजित नेटवर्क के होने की आशंका गहरा गई है। मामले के इसी छिपे हुए पहलू को बेनकाब करने के लिए पुलिस अधीक्षक ने एक आपातकालीन उच्चस्तरीय बैठक बुलाई, जिसमें इस पूरे घटनाक्रम के ‘बैकएंड’ को खंगालने का ब्लूप्रिंट तैयार किया गया।
विभाग के भीतर से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, अब पुलिस इन चोरियों को महज एक साधारण वारदात मानकर नहीं चल रही है। जांच की सुई उन अंतर-जिला गिरोहों की तरफ घूम गई है, जो सीमावर्ती इलाकों से आकर धार्मिक स्थलों को निशाना बनाते हैं और रात के सन्नाटे का फायदा उठाकर रफूचक्कर हो जाते हैं।
परदे के पीछे के किरदारों की तलाश: फिंगरप्रिंट और डार्क नेटवर्क पर नजर
पुलिस की मुख्य रणनीति अब उन चेहरों को बेनकाब करने की है जो पर्दे के पीछे रहकर इन वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। इसके लिए दोतरफा चक्रव्यूह तैयार किया गया है।जिसमे बीते कुछ सालों में संपत्ति संबंधी अपराधों और मंदिर चोरियों में शामिल रहे जेल से छूटे अपराधियों की अचानक नई सूची तैयार की गई है। संदेह के घेरे में आए कई निगरानी बदमाशों का गुप्त सत्यापन शुरू कर दिया गया है। जिन शातिर अपराधियों के फिंगरप्रिंट पहले रिकॉर्ड में नहीं थे, उन्हें नए सिरे से जुटाया जा रहा है ताकि घटनास्थल से मिले सुरागों से उनका मिलान किया जा सके।
कुरुद और भखारा से लगने वाली जिलों की सीमाओं पर मुखबिरों का एक नया और गुप्त नेटवर्क एक्टिव किया गया है, जो आधी रात के बाद होने वाली हर संदिग्ध हलचल की रिपोर्ट सीधे कप्तानों को दे रहा है।
डिजिटल फुटप्रिंट और डंप डेटा की चीर-फाड़:
परंपरागत तौर-तरीकों से आगे निकलकर, इस बार जांच की कमान सीधे साइबर सेल और फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) के तकनीकी एक्सपर्ट्स को सौंपी गई है। सूत्रों के अनुसार, वारदात के समय और उससे कुछ घंटे पहले घटनास्थलों के इर्द-गिर्द एक्टिव रहे मोबाइल टावरों का ‘डंप डेटा’ निकाला जा रहा है।
एक्सपर्ट्स की टीम उन मोबाइल नंबरों को फिल्टर कर रही है, जो कुरुद और भखारा क्षेत्र में पहली बार एक्टिव हुए या जिनका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। इसके साथ ही, पुराने अपराधियों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) के जरिए यह पता लगाया जा रहा है कि जेल के बाहर आने के बाद वे किन नए संदिग्धों के संपर्क में हैं।
सुरक्षा के छिद्र बंद करने की कवायद:
समीक्षा बैठक में यह बात भी सामने आई कि कई स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों की पोजिशनिंग और कवरेज एरिया में खामियां थीं। इसे दुरुस्त करने के लिए संवेदनशील धार्मिक स्थलों में ‘ब्लाइंड स्पॉट्स’ (जहाँ कैमरे नहीं देख पाते) की पहचान कर वहां नए हाई-डेफिनिशन कैमरे लगाने का काम शुरू कर दिया गया है।
थाना प्रभारियों को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि वे केवल सड़कों पर गश्त न करें, बल्कि ग्रामीण इलाकों के कोटवारों और मंदिर के पुजारियों के साथ एक ऐसा ‘साइलेंट नेटवर्क’ बनाएं, जिससे किसी भी अजनबी की आमद की खबर तुरंत थाने तक पहुंच जाए। साफ है कि पुलिस इस बार सीधे वारदात की जड़ तक पहुंचने की तैयारी में है।

