BY-Shailendra singh Baghel
बलरामपुर। नवरात्रि पर्व के दौरान बलरामपुर जिला मुख्यालय में एक विवाद खड़ा हो गया है, जिसने धार्मिक भावनाओं और प्रशासनिक कार्यप्रणाली दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नगर पालिका क्षेत्र में लगाए गए भगवा ध्वज को हटाने और उसके रख-रखाव को लेकर हिंदू संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने कड़ी आपत्ति जताई है।
क्या है पूरा मामला ..
जानकारी के अनुसार, नगर पालिका क्षेत्र में विभिन्न हिंदू संगठनों द्वारा पूर्व में लगाए गए भगवा ध्वज को हाल ही में हटाया गया। आरोप है कि इन ध्वजों को सम्मानपूर्वक सुरक्षित रखने के बजाय लापरवाहीपूर्वक कचरा वाहन के माध्यम से नगर पालिका कार्यालय लाया गया।
बताया जा रहा है कि ध्वज को कचरा गाड़ी में रखकर लाया गया और कार्यालय परिसर में भी उसे कचरा वाहन के पास ही रखा गया। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर स्थानीय लोगों और संगठनों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।

धार्मिक भावनाएं आहत होने का आरोप.

धार्मिक भावनाएं आहत होने का आरोप.
हिंदू संगठनों का कहना है कि भगवा ध्वज केवल एक झंडा नहीं, बल्कि आस्था, संस्कृति और सम्मान का प्रतीक है। नवरात्रि जैसे पवित्र पर्व के दौरान इस प्रकार की लापरवाही को उन्होंने अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।
संगठनों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने इसे धार्मिक प्रतीकों का अपमान करार देते हुए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

पार्षद अमित गुप्ता मंटू का तीखा बयान.
नगर पालिका परिषद के पार्षद अमित गुप्ता मंटू ने इस पूरे मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि भगवा ध्वज के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि नगर पालिका द्वारा ध्वज को कचरा वाहन में लाना और उसे कचरे के पास रखना गंभीर लापरवाही और असंवेदनशीलता का उदाहरण है।
पार्षद ने मांग की है कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाने की मांग ..
पार्षद और विभिन्न संगठनों ने प्रशासन से यह भी मांग की है कि धार्मिक प्रतीकों के रख-रखाव और उनके सम्मान को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाए जाएं। उनका कहना है कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और सावधानी बेहद जरूरी है।
सीएमओ का पक्ष भी आया सामने ..
विवाद बढ़ने के बाद नगर पालिका के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) ने भी इस मामले में अपना पक्ष रखा है। सीएमओ के अनुसार, हटाए गए भगवा ध्वज पुराने हो चुके थे और उन्हें हिंदू सेवा समिति द्वारा ही पूर्व में नगर पालिका को सौंपा गया था।
उन्होंने कहा कि पुराने और खराब हो चुके ध्वजों को हटाकर निस्तारित करने की प्रक्रिया के तहत ही उन्हें ले जाया जा रहा था। हालांकि, कचरा वाहन में ले जाने और रखने को लेकर उठे सवालों पर उन्होंने सीधे तौर पर कोई विस्तृत स्पष्टीकरण नहीं दिया।
शहर में चर्चा का माहौल, कार्रवाई का इंतजार ….
इस पूरे घटनाक्रम के बाद शहर में चर्चा का माहौल गर्म है। आम लोगों से लेकर सामाजिक संगठनों तक, सभी की नजर अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।
अब देखना होगा कि नगर पालिका इस मामले में क्या कदम उठाती है और क्या जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई होती है या नहीं।

