परमाणु हथियारों पर रोक—तेहरान.अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ एक ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य मध्य पूर्व में महीनों से जारी सैन्य संघर्ष को समाप्त करना है। एएफपी और अन्य वैश्विक मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फ्रांस के वर्साय पैलेस में जी7 शिखर सम्मेलन के समापन के बाद फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन के साथ रात्रिभोज के दौरान ट्रंप ने इस दस्तावेज़ पर अपनी मुहर लगाई।

समझौते का केंद्र: होर्मुज और युद्धविराम
इस समझौते के तहत, दोनों देशों ने सैन्य अभियानों को तत्काल प्रभाव से रोकने पर सहमति जताई है। व्हाइट हाउस से जुड़े आधिकारिक सूत्रों ने पुष्टि की है कि समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बिना किसी रुकावट के खोलने और अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को हटाने का प्रावधान शामिल है।
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- तत्काल युद्धविराम: लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई पर पूरी तरह रोक।
- आर्थिक राहत: 300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण फंड की योजना, जिसमें क्षेत्रीय साझेदार सहयोग करेंगे।
- परमाणु वार्ता: ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने की बात दोहराई है, साथ ही संवर्धित यूरेनियम के प्रबंधन के लिए 60 दिनों की समय-सीमा तय की गई है।
दोनों देशों की आधिकारिक पुष्टि
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने शिखर सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से बात करते हुए इसे एक बड़ी कूटनीतिक जीत बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता उन सभी लक्ष्यों को प्राप्त करता है जो हमने तय किए थे।
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आम नागरिकों पर प्रभाव और आगे की राह
इस समझौते के बाद वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों और शिपिंग की स्थिति में सुधार की उम्मीद है। मध्य पूर्व में तनाव कम होने से उन भारतीय प्रवासियों और व्यापारियों के लिए भी राहत की खबर है, जिनकी आजीविका खाड़ी क्षेत्र से जुड़ी है। आने वाले 60 दिनों तक दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल अंतिम समझौते (Final Deal) की शर्तों पर काम करेंगे। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस दौरान किसी भी प्रकार का सैन्य उल्लंघन करने पर स्थिति पुनः तनावपूर्ण हो सकती है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस कार्यान्वयन प्रक्रिया पर टिकी हैं।

