यशवंत गंजीर कुरुद। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के कुरुद ब्लॉक अंतर्गत ग्राम बगौद में सोमवार दोपहर उस वक्त हड़कंप मच गया, जब प्रशासनिक अमला भारी पुलिस बल और बुलडोजर (पीला पंजा) लेकर पहुंच गया। प्रशासन ने यहां एक निर्माणाधीन ढांचे को ‘अवैध अतिक्रमण’ बताते हुए जमींदोज कर दिया। इस कार्रवाई के दौरान मौके पर भारी हंगामा और विरोध देखने को मिला। जहां प्रशासन इसे सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा मान रहा है, वहीं पीड़ित पक्ष ने इसे पूरी तरह एकतरफा और दमनकारी कार्रवाई करार दिया है।
कार्रवाई की भनक लगते ही गांव के बजरंग चौक पर ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई। माहौल को भांपते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। मौके पर तहसीलदार सूरज बंछोर, स्थानीय थाना प्रभारी, ग्राम सरपंच दशोदा कमलेश साहू सहित राजस्व विभाग का पूरा अमला और पुलिस बल डटा रहा।
पीड़ित पक्ष के 3 बड़े दावे: ‘हमारे पास पट्टा और रजिस्ट्री दोनों हैं’:
कार्रवाई की जद में आए पीड़ित अभय रामव हेमचंद साहू और उनके परिवार ने इस एक्शन पर तीखा आक्रोश जताया है। उनके मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
1. 40 साल का कब्जा:परिवार का दावा है कि वे इस जमीन पर पिछले 40 वर्षों से काबिज हैं और वहां पहले से ही पत्थर की नींव डली हुई थी।
2. वैध रजिस्ट्री व पट्टा: उन्होंने इस जमीन को निजी (लगानी) समझकर खरीदा था, जिसकी बकायदा रजिस्ट्री है। इसके अलावा, साल 2017 में शासन ने उन्हें ‘मुख्यमंत्री आबादी पट्टा’ भी जारी किया था, जिसे पूर्व में तहसीलदार कोर्ट ने सही माना था।
3. अपील का मौका नहीं: पीड़ितों का आरोप है कि एसडीएम कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) में अपील करने का न्यूनतम समय भी नहीं दिया गया और अचानक ढांचा ढहा दिया गया।
प्रशासनिक पक्ष: नियमों के तहत हटाया गया अतिक्रमण
> “यह पूरी कार्रवाई अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) न्यायालय के आदेश के परिपालन में की गई है। राजस्व रिकॉर्ड के मुताबिक यह भूमि ‘आबादी’ दर्ज है। इस जगह पर बिना किसी वैध अनुमति या पट्टे के गैर-आवासीय (व्यावसायिक) निर्माण कार्य किया जा रहा था, जिसे अवैध मानते हुए हटाया गया है।”
> *- सूरज बंछोर, तहसीलदार, कुरुद*
अब आगे क्या?
अचानक हुए इस एक्शन से पीड़ित परिवार खुद को ठगा सा महसूस कर रहा है। उन्होंने इसे अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा पर गहरी चोट बताते हुए साफ किया है कि वे इस एकतरफा कार्रवाई के खिलाफ चुप नहीं बैठेंगे और न्याय के लिए जल्द ही उच्च न्यायालय (High Court) का दरवाजा खटखटाएंगे। फिलहाल गांव में इस कार्रवाई को लेकर तनावपूर्ण शांति बनी हुई है।

