यशवंत गंजीर धमतरी। थाना अर्जुनी पुलिस की टीम जब रोज़ की तरह ग्राम अमेठी के इलाके में पेट्रोलिंग कर रही थी, तब उन्हें अंदाज़ा भी नहीं था कि आज उनका सामना एक बेहद पेचीदा मामले से होने वाला है। घने सन्नाटे के बीच पुलिस को एक महिला संदिग्ध अवस्था में अकेली भटकती हुई दिखाई दी।
जब पुलिसकर्मी उसके करीब पहुंचे और उससे पूछताछ शुरू की, तो कहानी में एक ऐसा मोड़ आया जिसने पुलिस को भी उलझा कर रख दिया। महिला की मानसिक स्थिति पूरी तरह डगमगाई हुई थी। वह न तो ठीक से अपना पता बता पा रही थी और न ही यह कि वह वहां कैसे पहुंची।
धैर्य की परीक्षा और वो एक सुराग…
सहायक उपनिरीक्षक रामसिंह साहू और आरक्षक संजय ठाकुर ने हार नहीं मानी। घंटों की मशक्कत, धैर्य और संवेदनशीलता के बाद महिला के मुंह से आखिरकार कुछ धुंधले शब्द निकले— “दशोदा बाई… टेकापाल… भाई हेम कुमार।” बस यही वो सुराग था, जिसने इस पूरे सस्पेंस से पर्दा उठा दिया।
पुलिस ने कड़ियों को जोड़ा तो पता चला कि यह महिला (दशोदा बाई नेताम, पति खिलावन नेताम) छत्तीसगढ़ के ही बालोद जिले के ग्राम टेकापाल की रहने वाली है और पिछले 3 दिनों से लापता थी। घरवाले उसकी तलाश में दर-दर भटक रहे थे और अनहोनी की आशंका से डरे हुए थे।
थाने में जब आमने-सामने आए…
जैसे ही पुलिस ने पलारी में रहने वाले उसके भाई हेम कुमार से संपर्क किया, परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। भाई और भतीजा तुरंत भागते हुए अर्जुनी थाने पहुंचे। जैसे ही उन्होंने 3 दिन से लापता दशोदा बाई को सही-सलामत देखा, थाने में मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गई।
कागजी कार्रवाई और पहचान की पुष्टि के बाद पुलिस ने महिला को उसके परिवार के सुपुर्द कर दिया। परिजनों ने नम आंखों से धमतरी पुलिस के इस ‘सुपरकॉप’ वाले रूप का आभार माना।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वर्दी का काम सिर्फ अपराधियों को पकड़ना नहीं, बल्कि इस तरह भटकते हुए इंसानों को उनके अपनों से मिलाना भी है। यह मानवीय पहल आगे भी जारी रहेगी।

