प्रतापपुर/सूरजपुर (छत्तीसगढ़), 22 जून 2026।
विकासखंड मुख्यालय प्रतापपुर में सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग एवं संयुक्त सामाजिक संगठनों के तत्वावधान में सोमवार को एक दिवसीय विरोध प्रदर्शन कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। कार्यक्रम के तहत प्रतापपुर थाना परिसर के समीप से रैली निकाली गई, जो मुख्य मार्गों से होते हुए कदमपारा चौक पहुंची, जहां बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हुए और विभिन्न मुद्दों को लेकर प्रदर्शन करते हुए सांकेतिक पुतला दहन किया गया।
कार्यक्रम के दौरान सर्व आदिवासी समाज के प्रदेश उपाध्यक्ष रामकुमार बंछोर ने समाज के लोगों से एकजुट रहने की अपील करते हुए कहा कि अधिकारों की रक्षा के लिए संगठन और एकता अत्यंत आवश्यक है।
इस अवसर पर सोशल एक्टिविस्ट एवं सर्व आदिवासी समाज युवा प्रभाग के जिला अध्यक्ष बीपीएस पोया ने अपने संबोधन में बताया कि 6 जून 2026 को रायपुर में आयोजित आदिवासी संगठनों की संयुक्त बैठक में पारित प्रस्तावों के आधार पर तैयार संयुक्त ज्ञापन 22 जून को महामहिम राष्ट्रपति, राज्यपाल, मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ शासन के नाम सौंपा जा रहा है। इसी क्रम में प्रदेशभर के जिला मुख्यालयों में भी ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं।
उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा ‘वनवासी’ शब्द के उपयोग पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इससे आदिवासी समाज की पहचान और अस्मिता आहत होती है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “हम वनवासी नहीं, बल्कि आदिवासी हैं और प्रकृति के रक्षक हैं। अपनी पहचान, परंपरा और संस्कृति से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।”
बीपीएस पोया ने शिक्षा विभाग द्वारा जारी मंत्रोच्चारण संबंधी निर्देशों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था को धर्मनिरपेक्ष, वैज्ञानिक और समावेशी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी समुदायों की अपनी-अपनी सांस्कृतिक परंपराएं हैं, ऐसे में शिक्षा में धर्म आधारित हस्तक्षेप के बजाय विज्ञान एवं पर्यावरण आधारित दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान प्रमुख मांगों में स्थानीय भर्ती में प्राथमिकता एवं 32 प्रतिशत आरक्षण लागू करना, निजीकरण का विरोध, जल-जंगल-जमीन की सुरक्षा, भू-माफियाओं पर नियंत्रण के लिए कठोर कानून बनाना, आदिवासी धर्म कोड की मान्यता, परिसीमन से जुड़े मुद्दों का समाधान, ग्राम सभा की अनिवार्य सहमति, उद्योग-व्यापार एवं खनन में आदिवासियों की भागीदारी सुनिश्चित करना, नक्सल प्रभावित निर्दोष बंदियों की रिहाई, डीलिस्टिंग का विरोध, आस्था केंद्रों एवं देवगुड़ियों का संरक्षण, पेसा एवं वन अधिकार कानून का प्रभावी क्रियान्वयन, तथा आदिवासी शिक्षा, मातृभाषा और पाँचवीं अनुसूची के संरक्षण जैसे मुद्दे शामिल रहे।
आयोजकों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार एवं प्रशासन द्वारा इन मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो राज्यव्यापी आंदोलन तेज किया जाएगा।
कार्यक्रम में बिमला अगरिया (जिला अध्यक्ष, महिला प्रभाग), गौरीशंकर नेताम (जिला कार्यकारिणी सदस्य, युवा प्रभाग), विनय पावले (ब्लॉक अध्यक्ष, भैयाथान), लक्ष्मण आर्मो (मीडिया प्रभारी, रामानुजनगर), सफलाल (ब्लॉक अध्यक्ष, प्रतापपुर), अमर बहादुर सिंह आयाम, बनवारी खलखो, राजू सिंह आयाम, जीतन सोनहा, रामचंद्र मांझी, अंजली आयाम, लक्ष्मी बैगा, इंद्रपाल सिंह चेरवा, प्रदीप सिंह, राजेश सिंह पोया, राम सिंह पोया (GSU जिलाध्यक्ष), त्रिभुवन सिंह टेकाम,मंजू मिंज सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

