यशवंत गंजीर धमतरी। एक तरफ शासन किसानों के हित और त्वरित न्याय के दावे कर रहा है, वहीं धमतरी जिले के कुरुद विकासखंड के ग्राम पचपेड़ी से सामने आई तस्वीर इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। यहां एक किसान की मेहनत की पूरी फसल आग की भेंट चढ़ गई, लेकिन घटना के 45 दिन बाद भी पीड़ित किसान को राहत राशि नहीं मिल पाई है।
ग्राम पचपेड़ी निवासी किसान मनीष कुमार साहू पिता स्व. खेमलाल साहू के खेत में 2 मई 2026 की सुबह करीब 11 बजे अचानक आग लग गई। खेत के ऊपर से गुजर रही 11 केवी बिजली लाइन में शॉर्ट सर्किट के बाद निकली चिंगारी सूखी धान की फसल पर गिरी, जिससे देखते ही देखते करीब डेढ़ से पौने दो एकड़ में खड़ी फसल जलकर राख हो गई। किसान के अनुसार इस घटना में करीब एक लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि तेज गर्मी और सूखे खेत के कारण आग तेजी से फैली और किसान की महीनों की मेहनत कुछ ही देर में खत्म हो गई। लेकिन फसल जलने के बाद शुरू हुआ किसान का संघर्ष आज भी जारी है।
मुआवजे और सहायता की उम्मीद लेकर किसान कलेक्टर जनदर्शन पहुंचा। वहां से आवेदन विद्युत एवं राजस्व विभाग को भेजा गया, लेकिन दोनों विभागों से उसे यही जवाब मिला कि मुआवजे का प्रावधान नहीं है।
इसके बाद किसान ने सुशासन तिहार में भी राजस्व, विद्युत और कृषि विभाग के समक्ष अपनी गुहार रखी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। आखिरकार मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचाने की उम्मीद में किसान ने सीएम हेल्पलाइन 1076 पर संपर्क किया। करीब आधे घंटे की बातचीत के बाद भी उसे कोई ठोस राहत नहीं मिल सकी।
आज स्थिति यह है कि किसान की फसल भी चली गई और खेती के लिए लिया गया कर्ज भी उसके सिर पर है। किसान मनीष साहू अब शासन से मांग कर रहा है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर उसे आर्थिक सहायता दी जाए, ताकि वह दोबारा खेती की राह पर लौट सके।
सवाल यह है कि यदि किसी किसान की फसल बिजली व्यवस्था से जुड़े हादसे में बर्बाद हो जाती है, तो उसकी भरपाई की जिम्मेदारी किसकी होगी? क्या एक अन्नदाता को अपनी मेहनत की राख लेकर सिर्फ दफ्तरों के चक्कर काटते रहना पड़ेगा?
पीड़ित किसान को अब भी उम्मीद है कि शासन उसकी पीड़ा को समझेगा और जल्द न्याय मिलेगा।

