SIDE 2026 रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, 2025 के मुकाबले जबरदस्त सुधार
यह आंकड़े ICRIER-प्रोसस सेंटर फॉर इंटरनेट एंड डिजिटल इकोनॉमी (IPCIDE) द्वारा जारी की गई ‘स्टेट ऑफ इंडियाज डिजिटल इकोनॉमी’ (SIDE) 2026 रिपोर्ट में सामने आए हैं। इस वैश्विक सर्वे में दुनिया की 96% जीडीपी का प्रतिनिधित्व करने वाले 71 देशों को शामिल किया गया था। साल 2025 में भारत इस सूची में आठवें स्थान पर था, जहां से लंबी छलांग लगाकर देश अब पांचवें पायदान पर पहुंच गया है।
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रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि की गई है कि भारत और चीन मिलकर पूरी दुनिया के लगभग दो-तिहाई एआई यूजर्स का हिस्सा संभाल रहे हैं। इस समय दुनिया भर के 72 फीसदी एआई यूजर्स विकासशील देशों में मौजूद हैं। भारत अकेले वैश्विक स्तर पर करीब 26 प्रतिशत एआई उपयोगकर्ताओं का घर बन चुका है, जो इस तकनीक की तेज स्वीकार्यता को दिखाता है। भारत ने डिजिटली डिलीवर्ड ट्रेड (सॉफ्टवेयर और क्लाउड सेवाएं) के जरिए रिकॉर्ड 328 अरब डॉलर का व्यापार दर्ज किया है।
बढ़ती ताकत के बीच बुनियादी ढांचे और सुरक्षा की चुनौतियां
ग्लोबल CHIPS-AI इंडेक्स में चौथे स्थान पर काबिज भारत के आगे अब केवल अमेरिका, चीन और सिंगापुर ही बचे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के पास अमेरिका के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा AI टैलेंट पूल है। हालांकि, जमीनी स्तर पर कुछ बड़ी कमियां भी सामने आई हैं। भारत के पास एआई यूजर्स की विशाल संख्या होने के बावजूद, वैश्विक स्तर पर होने वाले कुल प्राइवेट एआई इन्वेस्टमेंट (निजी निवेश) का महज 1 प्रतिशत ही भारत के हिस्से आता है।
इसके अतिरिक्त, एडवांस सेमीकंडक्टर चिप्स और सुपरकंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में देश को अभी काफी निवेश की जरूरत है। देश में बढ़ती डिजिटल रफ्तार के साथ ही ऑनलाइन फाइनेंशियल फ्रॉड (वित्तीय धोखाधड़ी) और साइबर अपराध के मामलों में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई है। नीति निर्माताओं के सामने अब साइबर सुरक्षा को पुख्ता करने और देश के दूरदराज के इलाकों तक सुरक्षित इंटरनेट पहुंचाने की बड़ी जिम्मेदारी है।


