यशवंत गंजीर, धमतरी। आमापारा निवासी 80 वर्षीय गोपाल पटवा उन लोगों में हैं जिन्होंने बदलते दौर के साथ बाजारों का चेहरा बदलते देखा, लेकिन अपने संघर्ष और मेहनत का रास्ता नहीं छोड़ा। पिछले 55 वर्षों से वे धमतरी, कुरुद, भखारा, चारामा और केरेगांव के साप्ताहिक बाजारों में मनिहारी का सामान बेचकर परिवार का गुजर-बसर कर रहे हैं। उम्र के इस पड़ाव में भी उनका आत्मविश्वास और कार्य के प्रति समर्पण प्रेरणादायक है।
मौसम कोई भी हो, रोजी-रोटी की जंग जारी
सफेद बाल और झुर्रियों से भरा चेहरा उनकी उम्र की कहानी कहता है, लेकिन उनका जज्बा आज भी किसी युवा से कम नहीं है। कड़ाके की ठंड, झमाझम बारिश या तपती धूप—हर मौसम में वे अपना सामान लेकर बाजार पहुंचते हैं। फुटपाथ पर बिछी छोटी-सी दुकान ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है, जिसे वे पूरे आत्मसम्मान और ईमानदारी के साथ आज भी संभाले हुए हैं।
बदलते बाजार ने बढ़ाई चुनौतियां
गोपाल पटवा बताते हैं कि पहले साप्ताहिक बाजारों में भारी भीड़ उमड़ती थी और छोटे व्यापारियों की अच्छी बिक्री हो जाती थी। लेकिन समय के साथ बड़े शोरूम, मॉल और ऑनलाइन खरीदारी के बढ़ते चलन ने उनके जैसे छोटे कारोबारियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। आमदनी सीमित होने के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी और आज भी अपने पुश्तैनी व्यवसाय को जीवित रखने के लिए लगातार प्रयासरत हैं।
युवाओं के लिए प्रेरणा बना जीवन दर्शन
जीवन के लंबे अनुभवों से सीख लेते हुए गोपाल पटवा कहते हैं, “इंसान साधन से नहीं, साधना से महान बनता है। भवन से नहीं, भावना से महान बनता है और उच्चारण से नहीं, बल्कि अच्छे आचरण से महान बनता है।” उनका मानना है कि संघर्ष जीवन का हिस्सा है, लेकिन उम्मीद और मेहनत कभी नहीं छोड़नी चाहिए। 80 वर्ष की उम्र में भी उनका यह सकारात्मक दृष्टिकोण और आत्मसम्मान हजारों लोगों, खासकर युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।

