धमतरी। पवित्र रमजान माह की एक महीने की इबादत और कठिन रोजों के बाद शनिवार को धमतरी जिले में ईद-उल-फितर का त्यौहार पारंपरिक उल्लास, श्रद्धा और आपसी भाईचारे के साथ मनाया गया। धमतरी शहर के रत्नाबांधा चौक स्थित ईदगाह मैदान और कुरुद के ईदगाह में हजारों की संख्या में मुस्लिम भाइयों ने सामूहिक नमाज अदा कर देश-प्रदेश में अमन, तरक्की और खुशहाली की दुआ मांगी।
इबादत के साथ गूंजा इंसानियत का संदेश
धमतरी में नमाज से पूर्व इमाम ने रमजान की अहमियत और आपसी सौहार्द का संदेश दिया। वहीं कुरुद में हाफिज शेख अमानुल्लाह कादरी ने सामूहिक नमाज संपन्न कराई और इस्लाम को अमन का पैगाम देने वाला मजहब बताया। नमाज के बाद ‘ईद मुबारक’ की गूंज के साथ लोग एक-दूसरे के गले मिले। बच्चों में विशेष उत्साह देखा गया, जो नए कपड़ों में सजे आकर्षण का केंद्र रहे। मुस्लिम समाज के प्रतिनिधि इस्तियाक रोकड़िया ने बताया कि चांद की तस्दीक के बाद यह पर्व पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ।
गंगा-जमुना तहजीब की दिखी झलक
इस अवसर पर राजनीतिक और सामाजिक समरसता की अनूठी मिसाल देखने को मिली। धमतरी में महापौर रामू रोहरा और विधायक ओंकार साहू ने ईदगाह पहुंचकर मुबारकबाद दी। कुरुद में विधायक अजय चन्द्राकर ने आधुनिक (सोशल मीडिया) माध्यमों से बधाई प्रेषित की, जबकि उनके प्रतिनिधि भानु चन्द्राकर, जिला पंचायत सदस्य नीलम चन्द्राकर और ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष महिम शुक्ला सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने समाज के बीच पहुंचकर खुशियां बांटीं। नपा अध्यक्ष ज्योति चन्द्राकर की ओर से कब्रिस्तान में सीसी रोड और सौंदर्यीकरण कार्य जल्द शुरू कराने की घोषणा भी की गई।
शिक्षा और सेवा का संकल्प
कुरुद में नूरानी यंग वेलफेयर कमेटी द्वारा लोगों का मुंह मीठी सेवइयों से कराया गया। विशेष रूप से, आल मुस्लिम वेलफेयर फाउंडेशन के जिला अध्यक्ष सलामत अशरफी ने ‘एक रोटी कम खाओ, बच्चों को जरूर पढ़ाओ’ अभियान के तहत बच्चों को कलम और टॉफी भेंट कर शिक्षा के प्रति जागरूक किया। कार्यक्रम में १० दिनों तक ऐतेकाफ में बैठे ताहीर रज़ा का समाज के वरिष्ठों—अय्यूब खान और गफ्फार हलारी द्वारा इस्तकबाल किया गया।
सुरक्षा और व्यवस्था
त्यौहार को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम किए थे। प्रमुख चौक-चौराहों पर तैनात बल ने यातायात और कानून व्यवस्था संभाली, जिससे पूरा आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। अंत में समाजजनों ने कब्रिस्तान और मजार पहुंचकर अपने मरहूमीन (पूर्वजों) के हक में फातेहा पढ़ी।

