नागपुर: बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने छत्रपति शिवाजी महाराज और समर्थ रामदास स्वामी को लेकर हाल ही में दिए गए अपने विवादित बयान पर सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली है। पिछले कुछ दिनों से महाराष्ट्र में उनके बयान को लेकर भारी विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक गहमागहमी देखने को मिल रही थी, जिसके बाद बाबा बागेश्वर ने रविवार को नागपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए अपनी सफाई पेश की और खेद व्यक्त किया।
क्या था विवाद?
धीरेंद्र शास्त्री ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान दावा किया था कि छत्रपति शिवाजी महाराज युद्धों से थककर अपनी जिम्मेदारियां छोड़ने के लिए अपना मुकुट लेकर गुरु समर्थ रामदास स्वामी के पास गए थे। इस दावे को लेकर इतिहासकारों, विपक्षी दलों और मराठा संगठनों ने तीखी आपत्ति जताई थी। आलोचकों का तर्क था कि यह इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने का प्रयास है, जो महान योद्धा राजा की छवि को कमतर दिखाता है।
शास्त्री की सफाई और माफी:
रविवार को नागपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में धीरेंद्र शास्त्री ने स्पष्ट किया कि उनके इरादे गलत नहीं थे। उन्होंने कहा:
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गलत व्याख्या: शास्त्री ने दावा किया कि उनके बयान के एक अंश को संदर्भ से काटकर सोशल मीडिया पर वायरल किया गया। उनका कहना था कि वे छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रति अत्यंत सम्मान रखते हैं और ‘हिंदवी स्वराज’ का उनका संकल्प ही उनके लिए प्रेरणा का स्रोत है।
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भावनात्मक अपील: उन्होंने कहा, “मैं छत्रपति शिवाजी महाराज के अपमान की कल्पना भी नहीं कर सकता। यदि मेरे किसी शब्द से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मैं उसके लिए अत्यंत क्षमाप्रार्थी हूं।”
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गुरु-शिष्य परंपरा: उन्होंने दोहराया कि उनका उद्देश्य केवल महाराज की संतों के प्रति निष्ठा और समर्पण को उजागर करना था।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और विरोध :
इस विवाद ने महाराष्ट्र की राजनीति में भी उबाल ला दिया था। कांग्रेस समेत कई विपक्षी नेताओं ने बाबा पर इतिहास को विकृत करने का आरोप लगाया और राज्य सरकार से उनके कार्यक्रमों पर प्रतिबंध लगाने की मांग की। पूर्व राज्यसभा सांसद संभाजीराजे छत्रपति ने भी बाबा के बयान को “काल्पनिक और भ्रामक” बताते हुए कड़ी निंदा की थी।

