नई दिल्ली: भारतीय राजनीति में सोमवार को एक ऐतिहासिक और चौंकाने वाला घटनाक्रम देखने को मिला। राज्यसभा में आम आदमी पार्टी (AAP) के सात सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलय कर लिया है। राज्यसभा के चेयरमैन सी.पी. राधाकृष्णन ने इस विलय को आधिकारिक मंजूरी दे दी है, जिसके बाद उच्च सदन में समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। इस बड़े राजनीतिक फेरबदल के साथ ही एनडीए (NDA) गठबंधन की संख्या बल बढ़कर 148 तक पहुंच गई है।
विलय के मुख्य सूत्रधार और प्रक्रिया इस विलय की प्रक्रिया संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत पूरी की गई। नियमों के अनुसार, यदि किसी पार्टी के दो-तिहाई सांसद एकजुट होकर किसी अन्य दल में विलय करते हैं, तो दलबदल कानून के तहत उनकी सदस्यता प्रभावित नहीं होती। आम आदमी पार्टी के कुल 10 राज्यसभा सांसदों में से 7 सांसदों ने एकजुट होकर भाजपा का दामन थामा है, जिससे यह तकनीकी रूप से एक ‘वैध विलय’ की श्रेणी में आता है।
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कौन-कौन से सांसद हुए शामिल? इस विलय में पार्टी के कई दिग्गज चेहरे शामिल हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, भाजपा में शामिल होने वाले प्रमुख सांसदों में शामिल हैं:
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राघव चड्ढा: पार्टी के मुख्य रणनीतिकारों में से एक।
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हरभजन सिंह: पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर।
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संदीप पाठक: पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को संभालने वाले प्रमुख नेता।
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स्वती मालीवाल: महिला अधिकार कार्यकर्ता।
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अशोक कुमार मित्तल: लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के संस्थापक।
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राजेंद्र गुप्ता: उद्योगपति।
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विक्रमजीत सिंह साहनी: प्रमुख समाजसेवी।
NDA का मजबूत हुआ पलड़ा इस घटनाक्रम का सीधा असर राज्यसभा में सत्तापक्ष की ताकत पर पड़ा है। इस विलय के साथ ही, एनडीए अब उच्च सदन में पहले से कहीं अधिक मजबूत स्थिति में आ गया है। 148 सीटों के आंकड़े के साथ, सरकार अब विवादास्पद और महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में अधिक आसानी महसूस करेगी, क्योंकि अब उच्च सदन में विपक्ष की चुनौती काफी कम हो गई है।
AAP के लिए बड़ा झटका आम आदमी पार्टी के लिए यह एक बड़ा सियासी झटका माना जा रहा है। दिल्ली और पंजाब में सत्ता पर काबिज ‘आप’ के पास अब राज्यसभा में महज तीन सांसद रह गए हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटनाक्रम आने वाले समय में विपक्षी गठबंधन (INDIA ब्लॉक) की एकता और रणनीति पर भी गहरा असर डालेगा।

