By-यशवंत गंजीर कुरूद
राजनीति के गलियारों में जब ‘संगठन’ की बात होती है, तो प्रशिक्षण उसकी रीढ़ माना जाता है। इसी मूल विचार को साकार रूप देते हुए कुरूद में पं. दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान-2026 समपन्न हुआ। पांच दिनों तक चले इस बौद्धिक महाकुंभ में कुरूद विधानसभा के चार प्रमुख मंडलों—कुरूद, मेघा, भखारा और सिर्री—के कुल 742 चयनित कार्यकर्ताओं ने सहभागिता दर्ज कर संगठनात्मक शक्ति का परिचय दिया। CG NEWS IN HINDI

स्वामी विवेकानंद मंगल भवन के प्रांगण में 22 से 26 मार्च तक चली इस वैचारिक पाठशाला में भाजपा ध्वज के आरोहण के साथ राष्ट्रभक्ति की जो अलख जगी, उसने कार्यकर्ताओं के भीतर नई ऊर्जा और प्रतिबद्धता का संचार कर दिया।
प्रशिक्षण प्राप्त कर निकली भखारा मंडल के कार्यकर्ता गीतेश्वरी साहू, चोवाराम, खिलेश्वरी, सविता गंजीर ने बताया कि यह आयोजन महज प्रशिक्षण नहीं था, बल्कि विचार, व्यवहार और तकनीक के त्रिवेणी संगम का जीवंत उदाहरण था। ‘राष्ट्र प्रथम, संगठन सर्वोपरि’ का मूल मंत्र यहां केवल उद्घोष नहीं, बल्कि हर सत्र की आत्मा बनकर उपस्थित रहा।
मंथन के 32 अध्याय: परंपरा से आधुनिकता तक
करीब 32 सघन सत्रों में कार्यकर्ताओं को पार्टी के गौरवशाली इतिहास, सांस्कृतिक धरोहर और संगठनात्मक कार्यप्रणाली की गहराइयों से परिचित कराया गया। बूथ प्रबंधन की सूक्ष्म रणनीतियों से लेकर जनसंपर्क की प्रभावी तकनीकों तक, हर पहलू पर विस्तार से चर्चा हुई।
डिजिटल युग की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सोशल मीडिया, आईटी सेल और संचार माध्यमों के प्रभावी उपयोग पर विशेष मंथन किया गया। यह स्पष्ट संकेत था कि संगठन अब केवल पारंपरिक ढांचे तक सीमित नहीं, बल्कि तकनीकी दक्षता को भी अपनी ताकत बना रहा है।
प्रशिक्षण की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अंत में ऑनलाइन परीक्षा आयोजित की गई और सफल प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान कर उन्हें ‘प्रशिक्षित सिपाही’ के रूप में मान्यता दी गई

अजय चंद्राकर का संदेश: अंत्योदय ही अंतिम लक्ष्य
वरिष्ठ भाजपा नेता और कुरूद विधायक ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी केवल चुनावी राजनीति का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का एक सतत अनुष्ठान है। उन्होंने पं. दीनदयाल उपाध्याय के ‘अंत्योदय’ सिद्धांत की व्याख्या करते हुए कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की रोशनी पहुंचाना ही संगठन का मूल उद्देश्य है। सेवा, समर्पण और अनुशासन को उन्होंने कार्यकर्ता की पहचान बताया और कहा कि जब कार्यकर्ता का व्यक्तित्व निखरता है, तभी संगठन सशक्त और प्रभावी बनता है।
साथ ही उन्होंने बदलते दौर में डिजिटल मंचों की बढ़ती भूमिका पर बल देते हुए कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे वैचारिक संघर्ष के इस नए आयाम में भी सक्रिय भूमिका निभाएं।
अनुभवी नेतृत्व का मार्गदर्शन:
शिविर के विभिन्न चरणों में ज्योति चंद्राकर, रंजना साहू, पिंकी ध्रुव, प्रकाश बैस, विकल गुप्ता और सुरेश अग्रवाल जैसे दिग्गजों ने अपने अनुभव साझा किए। वक्ताओं ने संगठन की वैचारिक नींव, कार्यपद्धति, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और सरकार की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने के प्रभावी सूत्र बताए। यह मार्गदर्शन केवल भाषण नहीं, बल्कि एक सजीव संवाद था, जिसने कार्यकर्ताओं के भीतर आत्मविश्वास और स्पष्ट दृष्टि का संचार किया।
परदे के पीछे की रणनीति:
इस महाअभियान के सफल संचालन में तिलोकचंद जैन, भानु चंद्राकर और गौकरण साहू सहित पूरी टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सुनियोजित रणनीति और अनुशासित क्रियान्वयन ने इस आयोजन को एक आदर्श प्रशिक्षण मॉडल का स्वरूप प्रदान किया।CG NEWS IN HINDI
भविष्य के लिए तैयार ‘वैचारिक दूत’:
यह पांच दिवसीय आयोजन केवल एक शिविर नहीं, बल्कि संगठन के भविष्य की ठोस तैयारी है। 742 प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं की यह टोली अब अपने-अपने क्षेत्रों में ‘वैचारिक दूत’ बनकर उतरने को तैयार है।भाजपा का यह महाअभियान संकेत देता है कि संगठन अब केवल संख्या नहीं, बल्कि गुणवत्ता, प्रशिक्षण और वैचारिक स्पष्टता पर भी उतना ही ध्यान केंद्रित कर रहा है। आने वाले समय में यही प्रशिक्षित कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर संगठन की ऊर्जा को नई दिशा देंगे और डिजिटल से लेकर सामाजिक हर मोर्चे पर अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराएंगे।
