धमतरी। उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व की एंटी पोचिंग टीम ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए बाघ के शिकार की योजना को समय रहते विफल कर दिया है। इस मामले में वन विभाग ने बाघ की खाल का ‘कॉन्ट्रैक्ट’ देने वाले मुख्य सूत्रधार सहित कुल 7 आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। आरोपियों के पास से जहर, चीतल के सींग और शिकार में प्रयुक्त सामग्री बरामद की गई है।
गोपनीय सूचना पर घेराबंदी:
वन विभाग को गोपनीय सूत्रों से जानकारी मिली थी कि टाइगर रिजर्व क्षेत्र में कुछ बाहरी लोग बाघ के शिकार की फिराक में हैं। सूचना मिलते ही टीम ने सक्रियता दिखाई और 9 मई को ओडिशा के खिपरीमाल (थाना सिनापाली) निवासी रमन हेरना (76 वर्ष) को पकड़ा। तलाशी के दौरान उसके पास से चीतल का सींग बरामद हुआ। कड़ाई से पूछताछ करने पर आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने बाघ की खाल के लिए ग्राम कोसमखुंटा के एक व्यक्ति को ठेका दिया था।
नाले के पानी में जहर मिलाकर शिकार की तैयारी
मुख्य आरोपी की शिनाख्त पर जब टीम ने प्रभावित क्षेत्रों में पेट्रोलिंग तेज की, तो ओडिशा के कटफाड़ गांव के 6 अन्य लोगों को रिजर्व क्षेत्र में अवैध रूप से प्रवेश करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। ये आरोपी नाले के पानी में जहर डालकर जंगली जानवरों को मारने की कोशिश कर रहे थे। मौके से जहर की शीशी सहित मृत मछलियां और केकड़े जब्त किए गए हैं।
गिरफ्तार आरोपी और न्यायिक कार्रवाई:
वन विभाग द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों में शामिल हैं: रमन हेरना (मुख्य साजिशकर्ता) बुधराम पहरिया, अनंतराम पहरिया,.मनलाल पहरिया, दिगसन पहरिया, धनु चिड़ा, मधुराम पहरिया
सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिनों की न्यायिक रिमांड.पर जेल भेज दिया गया है।
सीमा पर हाई अलर्ट और ड्रोन से निगरानी:
बाघ के शिकार की इस गंभीर साजिश के खुलासे के बाद वन विभाग ने पूरे टाइगर रिजर्व क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सीमा पर विशेष कैंप लगाए गए हैं। साथ ही, दुर्गम इलाकों और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरों की मदद ली जा रही है।
इस महत्वपूर्ण ऑपरेशन में उदंती सीतानदी टाइगर रिजर्व की टीम, ओडिशा वनमंडल और गरियाबंद पुलिस की फॉरेंसिक टीम का विशेष योगदान रहा। विभाग अब मामले में जुड़े अन्य फरार आरोपियों की सरगर्मी से तलाश कर रहा है।

