कटनी जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली के कारण नवजात शिशुओं और माताओं की मौतें चिंता का विषय बनी हुई हैं। पिछले 13 वर्षों में हजारों मासूम जन्म के तुरंत बाद दम तोड़ चुके हैं, जबकि कई माताओं ने प्रसव के दौरान या बाद में अपनी जान गंवाई है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, कटनी जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की गंभीर स्थिति के चलते कुल 10,622 नवजात शिशुओं और 544 गर्भवती व प्रसूता महिलाओं की मौत दर्ज की गई है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी आधिकारिक आंकड़ों से जिले में मातृ और शिशु मृत्यु दर की भयावह स्थिति सामने आई है। ये आंकड़े वित्तीय वर्ष 2014-15 से लेकर 2026-27 (अब तक) की अवधि को दर्शाते हैं। इसी अवधि में 10,622 नवजात शिशुओं के साथ-साथ 5 वर्ष तक के 492 बच्चों की भी मौत दर्ज की गई है।
जन्म के साथ ही शुरू हो रही मौत की जंग
डॉक्टरों के अनुसार, नवजात बच्चों और माताओं की मौत के पीछे चिकित्सीय कमियां और प्रशासनिक लापरवाही दोनों समान रूप से जिम्मेदार हैं। जन्म के समय नवजात को पर्याप्त ऑक्सीजन न मिलना, प्रशिक्षित स्टाफ की कमी, समय पर इलाज न मिलना और गंभीर मामलों को समय रहते रेफर न किया जाना प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा निमोनिया, गंभीर संक्रमण (सेप्सिस), डिहाइड्रेशन, तेज बुखार और स्तनपान के बाद बच्चे को डकार न दिलाना भी नवजात की मौत का कारण बनता है।
खून की कमी से महिलाओं की मौत
वहीं मातृ मृत्यु के मामलों में जिले की लगभग 70 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया (खून की कमी) से पीड़ित हैं, जो गर्भावस्था के दौरान गंभीर जोखिम पैदा करता है। प्रसव के समय अत्यधिक रक्तस्राव (PPH), गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप (PIH), एक्लेम्पसिया (दौरे पड़ना), कार्डियक अरेस्ट और शॉक जैसी स्थितियां भी मौत की बड़ी वजह बन रही हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि जमीनी स्तर पर एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं की ओर से समय पर जांच, काउंसलिंग और निगरानी नहीं हो पा रही है। वहीं कई मामलों में परिजन भी समय पर इलाज नहीं कराते, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।
जिला अस्पताल में कतारों में कट रही जिंदगी
कटनी जिला अस्पताल में अव्यवस्थाएं अब अपवाद नहीं, बल्कि व्यवस्था का हिस्सा बन चुकी हैं। अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को ओपीडी की पर्ची बनवाने से लेकर डॉक्टर को दिखाने, जांच कराने और रिपोर्ट लेने तक लंबी कतारों का सामना करना पड़ता है।
पैथोलॉजी और एक्स-रे की रिपोर्ट समय पर नहीं मिलती, जबकि आवश्यक दवाओं की कमी के कारण गरीब मरीजों को बाहर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ती हैं। इलाज में होने वाली देरी का असर गंभीर मरीजों, गर्भवती महिलाओं और नवजातों पर भी पड़ रहा है।
राष्ट्रीय और राज्य औसत से पीछे कटनी
रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया के एसआरएस बुलेटिन (2022) और अन्य सर्वे रिपोर्ट के अनुसार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के मामले में कटनी की स्थिति राष्ट्रीय और राज्य औसत से कमजोर है। जहां देश का मातृ मृत्यु अनुपात 171 और मध्य प्रदेश का 130 दर्ज किया गया, वहीं कटनी में यह 239 तक पहुंचा।
वर्तमान में जिले में प्रति एक लाख प्रसव पर करीब 135 महिलाओं की मौत हो रही है। वहीं शिशु मृत्यु दर भी चिंताजनक है। देश और प्रदेश में प्रति हजार जीवित जन्म पर यह दर क्रमशः 34 और 43 है, जबकि कटनी में 65 दर्ज की गई। वर्तमान में जिले में प्रति 1,000 जीवित जन्म पर 35 नवजातों की मौत हो रही है, जो स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर चुनौतियों की ओर इशारा करती है।
‘फैक्ट फाइल’ पर एक नजर: जिले की वर्तमान स्थिति
4500: जिले में वर्तमान में कुल गर्भवती महिलाएं।
550: उच्च जोखिम (हाई रिस्क) श्रेणी में शामिल गर्भवती महिलाएं।
521: गंभीर एनीमिया (खून की कमी) से पीड़ित गर्भवती महिलाएं।
48: सीवियर एनीमिया एवं पीआईएच (हाई ब्लड प्रेशर) से प्रभावित महिलाएं।
15 से 20: जिला अस्पताल में प्रतिदिन प्रसव के लिए पहुंचने वाली महिलाएं।
20 से अधिक: एसएनसीयू में उपलब्ध वॉर्मर, जहां गंभीर नवजातों का उपचार किया जाता है।
2 से 3: प्रतिदिन गंभीर हालत में अन्य अस्पतालों के लिए रेफर किए जाने वाले नवजात।
समीक्षा बैठकें बनाम जमीनी हकीकत
एक तरफ सरकार मातृ एवं शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए जननी सुरक्षा योजना, पोषण अभियान और सुरक्षित प्रसव जैसी योजनाओं पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। अस्पतालों में डॉक्टरों, विशेषज्ञों और संसाधनों की कमी के कारण मरीजों को समय पर बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा है।
हाल ही में प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला ने स्वास्थ्य सुविधाओं और मैनपावर की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को डॉक्टरों और विशेषज्ञों की भर्ती को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। हालांकि बड़ा सवाल यह है कि क्या ये निर्देश सिर्फ बैठकों और फाइलों तक सीमित रहेंगे, या फिर अस्पतालों में भी इनका असर दिखाई देगा।
सीएमएचओ बोले-मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आई
कटनी सीएमएचओ डॉ. राज सिंह ने बताया पिछले कुछ वर्षों की तुलना में जिले में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आई है, लगातार सुधार हो रहा है। हम अपने निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत कर रहे हैं। आने वाले समय में गर्भवती महिलाओं और नवजातों की विशेष देखरेख सुनिश्चित कर मौतों के आंकड़ों को न्यूनतम स्तर पर लाया जाएगा।

