धमतरी । अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी युद्ध के बादलों ने अब आम आदमी की रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर खाद्य तेलों की कीमतों पर पड़ा है। धमतरी के बाजार में पिछले महज 15 दिनों के भीतर खाद्य तेल के एक डिब्बे (टीन) पर करीब 300 रुपये की भारी वृद्धि दर्ज की गई है।
थोक और चिल्लर व्यापारी परेशान
किराना एवं चिल्हर किराना समान के विक्रेता लूनकरण साहू, पूनमचंद, यादों राम, संतोष जैन, लोकेश सिन्हा, रवि चंद्राकर आदि ने बताया कि जो खाद्य तेल का टीन पहले 2050 रुपये में मिलता था, उसकी कीमत अब बढ़कर 2350 रुपये हो गई है। व्यापारियों का कहना है कि आमतौर पर कीमतों में 50 से 100 रुपये का उतार-चढ़ाव होता था, लेकिन 15 दिनों में 300 रुपये की यह अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी है।
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क्यों बढ़ रहे हैं दाम?
थोक व्यापारियों के अनुसार, खाद्य तेलों के निर्माण के लिए जरूरी कच्चा माल (Raw Material) विदेशों से आयात किया जाता है। युद्ध के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे लागत बढ़ गई है। इससे पहले रसोई गैस की कीमतों में भी 60 रुपये का इजाफा देखा गया था।
व्यापार पर पड़ा बुरा असर
त्योहारी और सहालग के सीजन में खाद्य तेलों की मांग अधिक रहती है, लेकिन कीमतों में अचानक आए इस उछाल ने ग्राहकों के हाथ खींच लिए हैं। लोग अब टीन खरीदने के बजाय फुटकर तेल लेने को मजबूर हैं, जिससे दुकानदारों का व्यापार ठप पड़ रहा है।
कालाबाजारी की आशंका
बाजार में चर्चा है कि कुछ लोग ‘आपदा में अवसर’ तलाश रहे हैं। स्थानीय लोगों ने इस बेतहाशा वृद्धि के पीछे कालाबाजारी की भी आशंका जताई है। प्रशासन से मांग की जा रही है कि वे कीमतों पर नियंत्रण रखें और स्टॉक की जांच करें ताकि आम जनता को राहत मिल सके।

