रायपुर | राजधानी रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में आयोजित गरिमामय जिला स्तरीय समारोह में छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग द्वारा युवा कथाकार चंद्रहास साहू को उनके उत्कृष्ट सृजनात्मक योगदान के लिए सम्मानित किया गया। यह आयोजन केवल सम्मान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छत्तीसगढ़ी भाषा, लोकसंस्कृति और साहित्यिक चेतना के जीवंत संगम के रूप में उभरकर सामने आया।
मंच पर दिग्गजों की गरिमामयी उपस्थिति
समारोह में प्रदेश के राजनीतिक और साहित्यिक क्षेत्र की कई प्रतिष्ठित हस्तियां मौजूद रहीं। मंच पर सुनील सोनी, अनुज शर्मा, चंद्रशेखर साहू, प्रभात मिश्रा, अभिलाषा बेहार, मीर अली मीर, अरुण निगम और रमेंद्रनाथ मिश्र प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
सृजन और सेवा का अद्भुत संगम
धमतरी जिले के जोरातराई(सी) से ताल्लुक रखने वाले चंद्रहास साहू वर्तमान में कृषि विभाग में ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के रूप में कार्यरत हैं। वे अपनी “सेवा और सृजन” की दोहरी भूमिका के माध्यम से समाज से गहराई से जुड़े हुए हैं। वक्ताओं ने कहा कि उनकी कहानियों में गांव, समाज और लोकजीवन की सच्ची तस्वीर उभरकर सामने आती है।
रचनाओं में झलकता छत्तीसगढ़ का जीवन
उनकी प्रमुख कृतियां—‘तिरबेनी’, ‘तुतारी’, ‘करिया अंग्रेज’, ‘मंगरोहन’, ‘गांधी चौरा’ और ‘सोनचिरई’—छत्तीसगढ़ी साहित्य को नई दिशा प्रदान कर रही हैं। इन रचनाओं में धान की बालियों के साथ उगती उम्मीदें, लोकजीवन की संवेदनाएं और सामाजिक चेतना की गहराई स्पष्ट रूप से महसूस की जा सकती है।
अकादमिक जगत में मजबूत पहचान
चंद्रहास साहू की साहित्यिक प्रतिभा अब शैक्षणिक संस्थानों में भी अपनी पहचान बना चुकी है। उनकी कृतियां पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय और हेमचंद विश्वविद्यालय के एम.ए. पाठ्यक्रम में शामिल हैं। साथ ही उनकी रचनाओं पर शोधार्थियों द्वारा पीएचडी स्तर पर अध्ययन भी जारी है।
गर्व का क्षण, नई पहचान की ओर कदम
समारोह के अंत में उनके परिजनों और मित्रों—मिनेश कुमार साहू, पोखनलाल जायसवाल, वीरेंद्र कुमार साहू, रामकुमार साहू और नागेश वर्मा सहित अन्य शुभचिंतकों ने हर्ष व्यक्त करते हुए बधाई दी। उन्होंने इसे छत्तीसगढ़ी साहित्य के लिए गर्व का क्षण बताया।
यह सम्मान इस बात का संकेत है कि छत्तीसगढ़ की माटी से निकली आवाज अब स्थानीय सीमाओं को पार कर व्यापक पहचान बना रही है और साहित्यिक आकाश में अपनी अलग चमक बिखेर रही है।

