चंदौली। कृषि प्रधान जनपद चंदौली में धान की खेती की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं लेकिन खेतों तक पानी पहुंचाने वाली माइनरों की बदहाली किसानों की चिंता बढ़ा रही है। धान की नर्सरी डालने का समय नजदीक है इसके बावजूद अधिकांश माइनरों की सफाई और खुदाई का कार्य अब तक शुरू नहीं हो सका है। ऐसे में किसान पानी की एक-एक बूंद के लिए परेशान हैं।
कभी पूर्व मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी के प्रयासों से जिले में सिंचाई के लिए नहरों का व्यापक जाल बिछाया गया था जिससे हजारों एकड़ बंजर भूमि सिंचित हुई और किसानों की आय में वृद्धि हुई। लेकिन समय के साथ नहरों और माइनरों के रखरखाव में लापरवाही के चलते व्यवस्था चरमराने लगी है।
Mamata Banerjee’ की TMC में बड़ी टूट, 58 विधायकों ने बनाया अलग गुट; ऋतब्रत बनर्जी बने नेता
क्षेत्र की बसरतिया-बासनी, जंसो की मड़ई, बाजितपुर, मोहब्बतपुर, डेढ़िल, दयालपुर, महरो, कोरी, पटपरा, कैली, कठौरी, महदेउल माइनर तथा धूस-नोनार ड्रेन सहित कई सिंचाई स्रोत झाड़ियों गाद और सिल्ट से पटे पड़े हैं। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते सफाई नहीं हुई तो नहरों में पानी छोड़े जाने के बाद भी वह टेल तक नहीं पहुंच पाएगा।
ग्रामीणों के अनुसार कई स्थानों पर माइनरों की पटरी टूटी हुई है। ऐसे में पानी खेतों तक पहुंचने के बजाय रास्ते में ही बह जाएगा जिससे धान की नर्सरी और सिंचाई दोनों प्रभावित होंगी।
किसानों ने सिंचाई विभाग से तत्काल माइनरों की सफाई खुदाई और मरम्मत कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो खरीफ सीजन की शुरुआत ही संकट में पड़ सकती है जिसका सीधा असर जिले के कृषि उत्पादन पर पड़ेगा।

