धमतरी।छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के धमतरी दौरे ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। विधायक निवास कार्यालय के लोकार्पण के बाद मीडिया से बातचीत में बघेल ने केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखा हमला बोलते हुए एक बड़े आर्थिक संकट की आशंका जताई—जिसके संकेत उन्होंने महंगाई, ईंधन और खाद की संभावित किल्लत से जोड़कर दिए।
बघेल ने दावा किया कि आने वाले समय में देश में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के दाम आम आदमी की पहुंच से बाहर हो सकते हैं। उनका कहना था कि “बंगाल चुनाव के बाद हालात तेजी से बदलेंगे और महंगाई का सीधा बोझ जनता पर पड़ेगा।”
खाद संकट के संकेत या राजनीतिक चेतावनी?
कृषि व्यवस्था पर चिंता जताते हुए बघेल ने कहा कि प्रदेश में डीएपी और यूरिया खाद के रैक तक नहीं उतर रहे हैं। उन्होंने इसे केवल प्रशासनिक समस्या नहीं, बल्कि आने वाले बड़े संकट का संकेत बताया।
“यूरिया गैस से बनता है और गैस सप्लाई प्रभावित है—तो आने वाले समय में खाद की भारी किल्लत हो सकती है,” उन्होंने कहा।
उन्होंने यह भी दावा किया कि कई होटलों को गैस सिलेंडर तक नहीं मिल रहे—जो सप्लाई चेन में गड़बड़ी का इशारा है।
‘नरवा-गरवा’ मॉडल बनाम वर्तमान नीति
अपनी सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए बघेल ने कहा कि यदि “नरवा, गरवा, घुरवा, बाड़ी” योजना लगातार चलती रहती, तो वर्मी कम्पोस्ट के जरिए किसानों की रासायनिक खाद पर निर्भरता कम हो सकती थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार न तो खाद की पर्याप्त व्यवस्था कर पा रही है और न ही धान खरीदी के प्रति गंभीर है।
महिलाओं को ‘लकड़ी-छेना’ की सलाह—कितनी गंभीर है स्थिति?
सबसे ज्यादा चर्चा बघेल की उस अपील ने बटोरी, जिसमें उन्होंने महिलाओं से कहा कि भविष्य की स्थिति को देखते हुए लकड़ी और पारंपरिक ईंधन की व्यवस्था कर लें।
यह बयान संकेत देता है कि वे गैस संकट को लेकर कितने गंभीर अंदेशे जता रहे हैं।
केंद्र पर सीधा हमला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों को जिम्मेदार ठहराते हुए बघेल ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका-इजरायल समीकरण का असर भारत पर भी पड़ रहा है, जिससे आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
उन्होंने एक्साइज ड्यूटी में कटौती को भी “जनता को राहत देने में विफल” बताया।
अफीम खेती और अवैध प्लॉटिंग पर भी सवाल
अफीम खेती के मुद्दे पर बघेल ने कहा कि सरकार को जानकारी दी जा चुकी है, लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही। वहीं धमतरी में अवैध प्लॉटिंग के मामलों पर उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा में मुद्दा उठने के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
राजनीतिक संदेश या जमीनी हकीकत?
धमतरी के अंबेडकर चौक पर जोरदार स्वागत के बाद बघेल का गंगरेल स्थित माँ अंगारमोती मंदिर जाना एक राजनीतिक और सांस्कृतिक संतुलन का संकेत भी माना जा रहा है।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या यह केवल राजनीतिक हमला है, या वाकई देश एक बड़े आर्थिक और संसाधन संकट की ओर बढ़ रहा है?
आने वाले महीनों में महंगाई, खाद और ईंधन की स्थिति ही इस दावे की असली परीक्षा होगी।

