(मनमोहन)
डीडीयू नगर। आर.पी.एफ की स्पेशल टीम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठे हैं। आरोप है कि मंगलवार देर रात काम से घर लौट रहे 17 वर्षीय सतीश पुत्र महेंद्र निवासी अमोघपुर को सादे कपड़ों में मौजूद टीम ने रोककर लॉकअप में बंद कर दिया।
परिजनों के मुताबिक पूछने पर टीम ने कहा कि जिस मोबाइल से सतीश बात कर रहा था उसका खरीद बिल उसके पास नहीं है इसलिए उसे छोड़ा नहीं जा सकता। परिजनों का आरोप है कि पूछताछ के नाम पर दबाव बनाया गया जिससे कथित उगाही की आशंका को भी बल मिला।

मामले को और गंभीर बनाता है परिजनों का यह दावा कि हिरासत से संबंधित कोई रिकॉर्ड या अरेस्ट मेमो उन्हें नहीं दिखाया गया। इससे कार्रवाई की वैधता पर सवाल खड़े हुए हैं और कानूनी प्रक्रिया के पालन को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
घटना ने कई सवाल खड़े किए हैं—क्या राह चलते किसी व्यक्ति को केवल मोबाइल बिल न होने पर हिरासत में लिया जा सकता है? या सुरक्षा जांच के नाम पर अधिकारों के दायरे को लेकर भ्रम की स्थिति है?
सूत्रों के मुताबिक स्टेशन परिसर और आसपास सादे कपड़ों में सक्रिय विशेष टीमें संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए काम करती हैं लेकिन इस घटना के बाद उनकी कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
इसी बीच स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा रही कि कुछ दिन पूर्व इसी टीम द्वारा एक व्यक्ति के पास से कथित तौर पर बड़ी संख्या में महंगे मोबाइल पकड़े गए थे। आरोप हैं कि उस मामले में कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठे थे। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
एक ओर नाबालिग को मोबाइल बिल के नाम पर हिरासत में लिए जाने का आरोप, दूसरी ओर पूर्व मामलों को लेकर चर्चाएं—इन सबने पूरे प्रकरण को संदेह के घेरे में ला दिया है।
परिजनों का दावा है कि सोशल मीडिया के जरिए देर रात वरिष्ठ अधिकारियों तक मामला पहुंचने के बाद युवक को छोड़ा गया।
लोगो की मांग है कि दोनों घटनाओं की स्वतंत्र जांच हो
स्टेशन CCTV फुटेज खंगाली जाए,लॉकअप रजिस्टर और जब्ती रिकॉर्ड की जांच हो,हिरासत/अरेस्ट मेमो से जुड़े रिकॉर्ड की समीक्षा हो
मामले में rpf का पक्ष जानने का प्रयास किया गया आधिकारिक प्रतिक्रिया मिलने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।

