कटनी। कानून व्यवस्था और आम नागरिकों की सुरक्षा के दावों की धज्जियां उड़ाता हुआ एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। जिले के रीठी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम अमगवां (हंगामा) का एक अपाहिज किसान न्याय की भीख मांगने के लिए पिछले दो महीनों से रीठी थाने और पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय के चक्कर काटने को मजबूर है। शारीरिक रूप से अक्षम यह पीड़ित किसान अपाहिज होने के कारण दूसरों के कंधों पर सवार होकर पुलिस के आला अफसरों के दरवाजे तक पहुंच रहा है, लेकिन रीठी पुलिस की कुंभकर्णी नींद टूटने का नाम नहीं ले रही है।
शुक्रवार को पीड़ित किसान एक बार फिर न्याय की आस में पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा। वहां उसने एसपी के समक्ष अपनी आपबीती सुनाते हुए स्थानीय पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। पीड़ित का कहना है कि जान से मारने की नीयत से उस पर और उसके पूरे परिवार पर कुल्हाड़ी तथा लोहे की रॉड से हमला करने वाले 14 नामजद आरोपी आज भी खुलेआम घूम रहे हैं, जबकि रीठी पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है।
सोची-समझी साजिश के तहत घर में घुसे 14 दबंग
शिकायतकर्ता किसान रामकिशोर, निवासी ग्राम अमगवां ने पुलिस अधीक्षक को सौंपे गए शिकायती पत्र में बताया कि घटना बीते 8 अप्रैल 2026 की रात लगभग 10:30 बजे की है। वह अपने घर पर परिवार के साथ था। इसी दौरान पुरानी रंजिश और एक सोची-समझी साजिश के तहत गांव के ही 14 रसूखदार दबंग लाठी, डंडे, लोहे की रॉड और कुल्हाड़ी जैसे जानलेवा हथियारों से लैस होकर उसके घर में जबरन घुस आए।
हमलावरों में मिल्लूलाल उर्फ बंधा, शंकर कुशवाहा, राघवेंद्र, सुखलाल बर्मन, राहुल बंशकार, धर्मेंद्र, एकलव्य, शनि, लक्ष्मीकांत, सुकल, वर्षा, कमलेश बाई, बल्लू और तेजीलाल शामिल थे,
घटना के करीब दो महीने बीत जाने के बाद भी पीड़ित परिवार को न्याय की जगह सिर्फ कोरा आश्वासन मिल रहा है। रामकिशोर का आरोप है कि घटना के तुरंत बाद रीठी थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन स्थानीय पुलिस ने मामले को पूरी तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया। पुलिस ने न तो आरोपियों के खिलाफ उचित और कड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया और न ही उनकी गिरफ्तारी के लिए कोई ठोस कदम उठाया।
पीड़ित रामकिशोर की जुबानी
दबंगों ने मुझे और मेरे परिवार को लगभग मार ही डाला था। मेरी बेटियों के हाथ टूट गए हैं। रीठी पुलिस हमारी कोई सुनवाई नहीं कर रही है। आरोपी आज भी गांव में खुलेआम घूम रहे हैं और केस वापस न लेने पर हमें जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। हम अपने ही घर में खौफ के साए में जीने को मजबूर हैं।
स्थानीय रीठी पुलिस की हीलाहवाली और कार्यप्रणाली से निराश होकर, अपनी जान की सुरक्षा की खातिर पीड़ित रामकिशोर को मजबूरन अपने बेटे के कंधे पर बैठकर एसपी कार्यालय आना पड़ा। पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाते हुए मांग की है कि
इस पूरे मामले की किसी निष्पक्ष अधिकारी से जांच कराई जाए।
आरोपियों के खिलाफ साधारण धाराओं के बजाय ‘हत्या के प्रयास’ (अटेम्प्ट टू मर्डर) का मामला दर्ज किया जाए।
इस संबंध में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. संतोष कुमार डेहरिया ने बताया कि भूमि को लेकर इनका विवाद हुआ था, जिसमें दोनों पक्षों
की ओर से प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है। अभी उनकी मेडिकल रिपोर्ट आनी शेष है; जैसे ही डॉक्टरों की रिपोर्ट सामने आएगी, उसी आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

