यशवंत गंजीर कुरूद। बदलते पर्यावरण, बढ़ती गर्मी और गायब होती गौरैया के बीच कातलबोड़ के स्कूली बच्चों ने प्रकृति को बचाने का जिम्मा अपने छोटे-छोटे हाथों में उठा लिया। शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल कातलबोड़ में आयोजित “बर्ड कंजर्वेशन एवं सीड बॉल कार्यशाला” में बच्चों ने मिट्टी, बीज और लकड़ी के घोंसलों के जरिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
परिक्षेत्र साहू समाज बानगर और कर्मचारी प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में बच्चों को बताया गया कि कैसे सीड बॉल के माध्यम से बंजर जमीनों को फिर से हरा-भरा बनाया जा सकता है और लकड़ी के घोंसलों से पक्षियों को सुरक्षित आश्रय मिल सकता है।
कार्यक्रम में पहुंचे इलाके के चर्चित ‘बर्डमैन’ मोहन साहू ने गौरैया संरक्षण की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि आधुनिक जीवनशैली और कंक्रीट के जंगलों के कारण पक्षियों का प्राकृतिक आशियाना तेजी से खत्म हो रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले सात वर्षों में वे 15 हजार से अधिक लकड़ी के घोंसले और 3 हजार टीन शेड लगाकर पक्षियों को सुरक्षित घर उपलब्ध करा चुके हैं।
उन्होंने बच्चों से कहा, “अगर अभी से पक्षियों और पेड़ों को बचाने की पहल नहीं की गई, तो आने वाली पीढ़ी प्रकृति को सिर्फ तस्वीरों में देखेगी।”
इसके बाद शिक्षक प्रमोद साहू ने बच्चों को मिट्टी, खाद और बीज से सीड बॉल बनाने का प्रशिक्षण दिया। बच्चों ने उत्साहपूर्वक सीड बॉल तैयार किए और हर बच्चे ने 100 सीड बॉल बनाने का “ग्रीन चैलेंज” स्वीकार किया।
कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने अपने घरों के बाहर परिंडे और घोंसले लगाने का संकल्प लिया। प्रेमचंद साहू और भुनेश्वर साहू के नेतृत्व में आयोजित इस अभियान को ग्रामीणों और सामाजिक पदाधिकारियों ने सराहा।

