कटनी जिले के रीठी क्षेत्र के मुहास गांव में स्थित शिवधाम अब एक प्रमुख तीर्थ स्थल के रूप में उभरकर सामने आ रहा है। यहां ब्राह्मण समाज तहसील रीठी द्वारा भगवान परशुराम के नवनिर्मित मंदिर में उनकी विशाल प्रतिमा की स्थापना वैदिक रीति-रिवाजों के साथ धूमधाम से संपन्न कराई गई।
दो दिवसीय आयोजन का भव्य समापन:
जयपुर से लाई गई भगवान परशुराम की इस भव्य प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा पंडित रामकेत शास्त्री एवं अन्य विद्वान पुरोहितों द्वारा कराई गई। दो दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन का समापन आज हर्षोल्लास के साथ हुआ।
संतों और विद्वानों के प्रेरणादायक विचार:
इस अवसर पर परम पूज्य डॉ. रजनीश शास्त्री ने कहा कि भगवान परशुराम के जीवन चरित्र को आत्मसात करना ही सच्चा कल्याण है। उन्होंने कहा कि समाज को उनके आदर्शों पर चलना चाहिए, तभी इस प्रतिमा स्थापना की सार्थकता सिद्ध होगी।
वहीं पंडित विनोद शुक्ला जी महाराज ने कहा कि भगवान परशुराम केवल ब्राह्मणों के नहीं, बल्कि समस्त समाज के आराध्य हैं और उनके जीवन से हम सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए।
समाज के नेताओं का संदेश:
ब्राह्मण समाज के जिला अध्यक्ष राजू शर्मा, महामंत्री सूर्यकांत गौतम एवं जिला पंचायत प्रतिनिधि अजय पप्पू मिश्रा ने अपने विचार रखते हुए विशेष रूप से युवाओं से नशे से दूर रहने और एक आदर्श समाज निर्माण में योगदान देने की अपील की।
वरिष्ठजनों का सम्मान:
कार्यक्रम के दौरान समाज के लगभग एक दर्जन वरिष्ठजनों का शाल एवं पुष्पहार से सम्मान किया गया। इनमें रवि दुबे, मुन्ना लाल दुबे, सुदामा दुबे, अवधेश मिश्रा, भोला महाराज, राममिलन दुबे, रोहिणी दुबे सहित अन्य शामिल रहे। साथ ही सरमन पटेल को भी उनके सहयोग के लिए सम्मानित किया गया।
अतिथियों का भव्य स्वागत:
तहसील अध्यक्ष पुष्पेंद्र मिश्रा, महामंत्री रितेश तिवारी, सोमदत्त तिवारी, सेवाकांत मिश्रा, प्रथम दुबे, श्रीमती उर्मिला दुबे, संतोष दुबे, रमाकांत दुबे, विनोद दुबे, सुशील पाठक सहित अन्य ने अतिथियों का स्वागत किया।
समाज सेवा का संकल्प:
कार्यक्रम संयोजक विपिन तिवारी ने बताया कि ब्राह्मण समाज हर समय सेवा के लिए तत्पर है। भविष्य में शिक्षा और इलाज से संबंधित सहायता भी समाज द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी।
बड़ी संख्या में उपस्थित रहे श्रद्धालु:
इस आयोजन में प्रभु नारायण दुबे, सत्यम दुबे, दिनेश दुबे, कमलेश पाठक, मनीष दुबे, मुन्नालाल दुबे, संजय दुबे, गौरी शंकर दुबे, किशन मिश्रा, राधेश्याम उपाध्याय, बलराम दुबे, दुर्गा महाराज सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सामाजिक एकता और संस्कारों को मजबूत करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ।

