यशवंत गंजीर,धमतरी। जिले के नगरी थाना क्षेत्र में मंगलवार शाम हुआ सड़क हादसा महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों की बदहाल सड़क सुरक्षा और कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत बयान करता है। गजकन्हार और कल्लेमेटा के बीच पेड़ से टकराई एक बाइक ने एक युवक की जान ले ली, जबकि दूसरा युवक गंभीर हालत में जिंदगी की जंग लड़ रहा है।
क्या सिर्फ एक कीड़ा बना मौत की वजह?
जानकारी के मुताबिक अमाली निवासी पेमन ध्रुव अपने साथियों रौशन यादव और हिथलेश के साथ माडमसिल्ली बांध घूमकर लौट रहे थे। रास्ते में बाइक चला रहे पेमन की आंख में अचानक उड़ता हुआ कीड़ा घुस गया। कुछ ही सेकंड में बाइक अनियंत्रित हुई और सीधे पेड़ से जा भिड़ी। सवाल यह उठता है कि क्या सिर्फ एक कीड़ा किसी की जान ले सकता है, या इसके पीछे सुरक्षा नियमों की अनदेखी भी जिम्मेदार है?
28 May 2026 Horoscope : इस राशि के जातक अपने प्यार के साथ बिताएं समय, जानिए अपना राशिफल …
स्थानीय लोगों के अनुसार बाइक तेज रफ्तार में थी और चालक ने फुल-फेस हेलमेट या वाइजर का इस्तेमाल नहीं किया था। यदि हेलमेट का शीशा बंद होता तो शायद आंख तक कीड़ा पहुंचता ही नहीं। विशेषज्ञ मानते हैं कि तेज रफ्तार ने हादसे को और घातक बना दिया।
हादसे के बाद क्यों नहीं बच सकी जान?
दुर्घटना के बाद घायलों को नगरी सिविल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां केवल प्राथमिक उपचार के बाद दोनों को जिला अस्पताल धमतरी रेफर कर दिया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि अगर नगरी में ही बेहतर आपातकालीन सुविधा उपलब्ध होती, तो पेमन ध्रुव की जान बचाई जा सकती थी।
यह घटना एक बार फिर “गोल्डन आवर” की अहमियत पर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों के अनुसार दुर्घटना के बाद पहला घंटा सबसे महत्वपूर्ण होता है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रॉमा सेंटर और आईसीयू जैसी सुविधाएं अब भी नदारद हैं।
सड़क सुरक्षा सिर्फ चालान तक सीमित?
ग्रामीणों का कहना है कि अधिकांश लोग हेलमेट को सुरक्षा नहीं बल्कि पुलिस चालान से बचने का साधन मानते हैं। यही लापरवाही कई बार जानलेवा साबित होती है। सवाल यह भी है कि क्या सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता अभियान सिर्फ शहरों तक सीमित रह गए हैं?
पुलिस की जांच जारी
नगरी पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। वहीं स्थानीय लोगों ने नगरी क्षेत्र में ट्रॉमा सेंटर और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की मांग तेज कर दी है, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।

