यशवंत गंजीर। सरगुजा के सीतापुर में नायब तहसीलदार के साथ हुई कथित मारपीट और उसके बाद पूरे प्रदेश में अधिकारियों की जारी अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच, भाजपा के कद्दावर और वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने एक ऐसा बयान दे दिया है जिसने इस पूरे विवाद को एक नया मोड़ दे दिया है। प्रशासनिक हल्कों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक अब सिर्फ इसी बात की चर्चा है कि आखिर चंद्राकर का इशारा किस तरफ था?
दबाव के बीच ‘लक्ष्मण रेखा’ का जिक्र क्यों?
राजस्व अधिकारियों की चौतरफा तालाबंदी और तीखे तेवरों के बीच अजय चंद्राकर ने सीधे तौर पर दबाव की राजनीति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि अधिकारियों को केवल कार्रवाई की मांग या काम बंद करने पर अड़े रहने के बजाय आत्ममंथन करना चाहिए। चंद्राकर ने पूछा, “यूनियन किस बात की जांच की मांग कर रहा है, पहले यह तो स्पष्ट करे। किसी को हटा देना या कार्रवाई की मांग करना अलग विषय है, लेकिन असली बात यह देखना है कि आखिर यह नौबत आई क्यों? लक्ष्मण रेखा किसने लांघी, इसकी जांच होनी चाहिए।”
उन्होंने ब्यूरोक्रेसी को आईना दिखाते हुए याद दिलाया कि लोकतंत्र में जनता द्वारा चुने गए जनप्रतिनिधि की अपनी एक गरिमा और सर्वोच्चता होती है, जिसका सम्मान हर हाल में किया जाना चाहिए।
क्या है वह मामला, जिसने पूरे प्रदेश को हिलाया?
दरअसल, यह पूरा बवाल सरगुजा जिले के सीतापुर में भाजपा विधायक रामकुमार टोप्पो और उनके समर्थकों द्वारा नायब तहसीलदार तुषार मानिक के साथ की गई कथित मारपीट के बाद शुरू हुआ। इस घटना से आक्रोशित प्रदेशभर के तहसीलदार और नायब तहसीलदार पहले सामूहिक अवकाश पर गए और अब अनिश्चितकालीन कामबंद हड़ताल पर बैठ गए हैं, जिससे जमीनी स्तर पर राजस्व के सारे काम ठप पड़ चुके हैं।
हसदेव अरण्य पर भी दागे तीखे सवाल, कांग्रेस को दी खुली चुनौती
बात सिर्फ यहीं नहीं रुकी, अजय चंद्राकर ने इस मौके पर हसदेव अरण्य के मुद्दे को लेकर प्रदर्शन की चेतावनी देने वाले नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए खुली चुनौती दी कि हसदेव अरण्य पर राजनीति करने के बजाय पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार ने अपने पूरे कार्यकाल में वहां क्या-क्या कदम उठाए थे, उन तमाम कागजातों और दस्तावेजों को पहले जनता के सामने सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

