यशवंत गंजीर धमतरी। नशे के खिलाफ बड़ी-बड़ी योजनाएं, करोड़ों के अभियान और सरकारी दावे—लेकिन जमीनी हकीकत क्या है? इसी सवाल का जवाब तलाशने एक युवक साइकिल उठाकर सड़कों पर उतर गया है। धमतरी जिले के ग्राम चर्रा (कुरूद) निवासी 35 वर्षीय तुलसीराम साहू इन दिनों नेपाल की ओर साइकिल यात्रा पर हैं, लेकिन उनकी यह यात्रा सिर्फ एक सफर नहीं, बल्कि सिस्टम और समाज—दोनों को आईना दिखाने की कोशिश है।
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा की प्रेरणा और समाज कल्याण विभाग के सहयोग से शुरू हुई इस यात्रा को जिला पंचायत सीईओ गजेंद्र सिंह ठाकुर ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। लेकिन असली सवाल यह है—क्या एक व्यक्ति की यह पहल उस नशे की समस्या को चुनौती दे पाएगी, जो गांव-गांव तक अपनी जड़ें जमा चुकी है?
जमीनी हकीकत बनाम अभियान:
तुलसीराम का कहना है कि उन्होंने अपनी यात्राओं के दौरान देखा कि नशा अब सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ग्रामीण युवाओं को तेजी से अपनी गिरफ्त में ले रहा है। कई परिवार बर्बाद हो रहे हैं, लेकिन जागरूकता अभी भी अधूरी है।
एक यात्रा, कई सवाल:
नेपाल स्थित राधा स्वामी सत्संग व्यास डेरा तक की यह यात्रा प्रतीकात्मक जरूर है, लेकिन इसके मायने गहरे हैं। क्या सरकार के अभियान जमीनी स्तर तक पहुंच पा रहे हैं? क्या युवाओं को सही दिशा मिल रही है? या फिर ऐसे व्यक्तिगत प्रयास ही बदलाव की असली उम्मीद बन रहे हैं?
पहले भी उठा चुके हैं जिम्मा:
तुलसीराम का यह अभियान अचानक नहीं है।
2020: नारी सम्मान के लिए दल्लीराजहरा से दिल्ली तक साइकिल यात्रा
2024: धमतरी से अयोध्या तक नशामुक्ति संदेश
2025: कई राज्यों में भ्रमण कर जनजागरण
हर बार उनका रास्ता कठिन रहा, लेकिन सवाल वही—क्या इन यात्राओं का असर स्थायी हो पाया?
‘एक भी जिंदगी बदली, तो जीत’:
रवाना होते वक्त तुलसीराम ने साफ कहा—“मैं आंकड़ों के लिए नहीं, बदलाव के लिए निकलता हूं। अगर एक भी युवा नशे से दूर होता है, तो मेरी जीत है।”
तुलसीराम की साइकिल अब सड़कों पर है, लेकिन असली दौड़ उस सोच से है, जो नशे को ‘सामान्य’ मान चुकी है। सवाल अब भी खड़ा है—क्या बदलाव के लिए हमें और तुलसीराम चाहिए, या सिस्टम खुद जागेगा?

