धमतरी। जिला अस्पताल धमतरी की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर कटघरे में है। इलाज के लिए भर्ती एक मरीज का रात के अंधेरे में वार्ड से गायब होना और सुबह उसकी लाश पेड़ पर लटकी मिलना, अस्पताल प्रबंधन की भारी लापरवाही को उजागर कर रहा है। हाथ में ड्रिप (केनुला) और पट्टी लगे होने के बावजूद मरीज का गेट से बाहर निकल जाना सिस्टम की सजगता पर बड़ा तमाचा है।
केस 1: अस्पताल की सुरक्षा भेदी और लगा ली फांसी
रिसाईपारा निवासी 34 वर्षीय सोनू गुप्ता, जो पेशे से चालक था, हाथ-पैर में झुनझुनी की शिकायत के बाद जिला अस्पताल में भर्ती हुआ था। सोमवार रात जब नर्सिंग स्टाफ और सुरक्षा गार्ड की तैनाती थी, तब सोनू चुपचाप वार्ड से बाहर निकल गया। हैरानी की बात यह है कि किसी ने उसे टोकना भी जरूरी नहीं समझा। मंगलवार सुबह अस्पताल के पास पीडी नाला क्षेत्र में एक पेड़ पर उसका शव फंदे से लटका मिला।
केस 2: शौचालय में वृद्ध ने दी जान
एक अन्य हृदयविदारक घटना में, गणेश चौक निवासी 65 वर्षीय दिलीप नामदेव ने बांसपारा स्थित एक शौचालय में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि वह लंबे समय से पेट दर्द की बीमारी से जूझ रहे थे। लगातार हो रही इन मौतों ने शहर में हड़कंप मचा दिया है।
उठते गंभीर सवाल: क्या सिर्फ कागजों पर है सुरक्षा?
अस्पताल में हुई इस घटना ने प्रबंधन को इन सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है: रात के समय ड्यूटी पर तैनात नर्सिंग स्टाफ और गार्ड्स क्या कर रहे थे? क्या अस्पताल में गंभीर बीमारियों या तनाव से जूझ रहे मरीजों की मानसिक स्थिति पर ध्यान नहीं दिया जाता? महज 15 दिन पहले बर्न वार्ड में एक युवती ने खुदकुशी की थी। उसके बावजूद सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए गए?
”अस्पताल वह जगह है जहाँ लोग बचने की उम्मीद में आते हैं। अगर यहाँ से मरीज गायब होकर जान दे रहे हैं, तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक विफलता है।”
पुलिस की कार्रवाई जारी
कोतवाली पुलिस ने दोनों ही मामलों में मर्ग कायम कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज और ड्यूटी चार्ट खंगाल रही है ताकि यह पता चल सके कि मरीज किस रास्ते से और किस समय बाहर निकला।
15 दिवस के भीतर हुई दो बड़े घटनाक्रम से धमतरी जिला अस्पताल अब ‘इलाज’ से ज्यादा अपनी ‘लापरवाही’ के लिए चर्चा में है। देखना होगा कि इस बार भी जांच के नाम पर खानापूर्ति होती है या जिम्मेदार अधिकारियों पर गाज गिरती है।

