यशवंत गंजीर, धमतरी। कृषि क्षेत्र में तकनीकी क्रांति की दिशा में धमतरी ने एक नई मिसाल पेश की है। जिला प्रशासन के दावे के अनुसार धमतरी देश का पहला ऐसा जिला बन गया है, जहां प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (PACS) के माध्यम से किसानों को ड्रोन स्प्रेयर की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। सवाल यह है कि क्या यह पहल वास्तव में खेती की तस्वीर बदल पाएगी या फिर अन्य योजनाओं की तरह सीमित दायरे में सिमटकर रह जाएगी?
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के मार्गदर्शन में जिले की 10 PACS समितियों में ड्रोन स्प्रेयर सुविधा शुरू की गई है। लोहरसी समिति में आयोजित कार्यक्रम में ड्रोन पायलटों ने खेतों में उर्वरक और कीटनाशकों के छिड़काव का प्रदर्शन किया। प्रशासन का दावा है कि इससे किसानों का समय, श्रम और लागत तीनों घटेंगे, जबकि उत्पादन क्षमता बढ़ेगी।
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इस पहल का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि PACS समितियों को CSC e-Governance के सहयोग से बहुउद्देशीय सेवा केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यानी किसानों को एक ही स्थान पर कृषि तकनीक के साथ विभिन्न डिजिटल और शासकीय सेवाएं भी मिल सकेंगी।
हालांकि कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रोन तकनीक तभी सफल होगी जब इसकी सेवाएं छोटे और सीमांत किसानों तक किफायती दरों पर पहुंचें। साथ ही ड्रोन संचालन, रखरखाव और नियमित उपलब्धता भी बड़ी चुनौती होगी।
जिले की बोड़रा, लोहरसी, दोनर, अछोटा, खरेंगा, भोथीडीह, कुंदेल, गड़ाडीह, जुगदेही और करेली समितियों को इस योजना से जोड़ा गया है। यदि यह प्रयोग जमीन पर सफल साबित होता है तो धमतरी न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि देश के लिए भी सहकारी कृषि मॉडल का नया उदाहरण बन सकता है। फिलहाल किसानों और कृषि विशेषज्ञों की नजर इस महत्वाकांक्षी पहल के वास्तविक परिणामों पर टिकी हुई है।

