रायपुर। छत्तीसगढ़ की छत्तीसगढ़ विधानसभा में विष्णुदेव साय सरकार ने धर्मांतरण के खिलाफ कड़ा कदम उठाते हुए ‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026’ पेश किया है। इस विधेयक का उद्देश्य अवैध और जबरन धर्मांतरण पर रोक लगाना तथा सामाजिक संतुलन बनाए रखना है।
मुख्य प्रावधान इस प्रकार हैं:
उम्रकैद का प्रावधान: धोखे, लालच, बल प्रयोग या अनुचित प्रभाव से धर्म परिवर्तन कराने पर आजीवन कारावास तक की सजा।
सख्त जुर्माना: अपराध की गंभीरता के अनुसार भारी आर्थिक दंड का प्रावधान।
पूर्व सूचना अनिवार्य: धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को सूचना देना अनिवार्य।
धर्माचार्य के लिए नियम: धर्म परिवर्तन कराने वाले व्यक्ति को एक माह पूर्व प्रशासन को जानकारी देनी होगी।
विवाह हेतु धर्मांतरण अमान्य: केवल शादी के उद्देश्य से किया गया धर्म परिवर्तन शून्य माना जाएगा।
सामूहिक धर्मांतरण पर कार्रवाई: समूह में धर्म परिवर्तन कराने वालों पर कड़ी सजा और कानूनी कार्रवाई।
शिकायत का अधिकार: पीड़ित के अलावा उसके माता-पिता, भाई-बहन या अन्य रक्त संबंधी भी एफआईआर दर्ज करा सकेंगे।
सरकार का दावा है कि यह कानून राज्य में लंबे समय से चल रहे धर्मांतरण विवादों पर रोक लगाएगा और सामाजिक समरसता को मजबूत करेगा। वहीं, इस विधेयक को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज होने की संभावना है।

