BY यशवंत गंजीर
असम में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए की ऐतिहासिक वापसी के साथ ही एक ऐसी प्रेरक कहानी चर्चा के केंद्र में है, जो विस्थापन, कठोर परिश्रम और अपनी मिट्टी से अटूट जुड़ाव की अनूठी मिसाल पेश करती है। बीते मंगलवार, 12 मई 2026 को मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ शपथ लेने वाले मंत्रियों में रामेश्वर तेली का नाम छत्तीसगढ़ के लिए विशेष गौरव का विषय बना हुआ है। उनकी जड़ें आज भी छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव और बालोद जिले के सरहदी गाँव घुमका में धड़कती हैं, जहाँ से उनके पूर्वजों का नाता रहा है।
रामेश्वर तेली का पारिवारिक इतिहास उन लाखों छत्तीसगढ़िया परिवारों की दास्तां है, जिन्हें करीब 140 साल पहले अंग्रेजी शासनकाल के दौरान चाय बागानों में मजदूरी के लिए असम ले जाया गया था। 19वीं सदी में विस्थापित हुए इस ‘टी-ट्राइब’ (चाय जनजाति) समुदाय के लिए आज तेली का कैबिनेट मंत्री पद तक पहुँचना किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है। यह न केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता है, बल्कि उन पूर्वजों के दशकों पुराने संघर्ष को एक सच्ची श्रद्धांजलि भी है। सूत्रों की माने तो वर्तमान में असम में छत्तीसगढ़ मूल के लगभग 15 लाख लोग निवास करते हैं, जो वहां की अर्थव्यवस्था और संस्कृति की रीढ़ माने जाते हैं।
राजनीतिक सफर की बात करें तो रामेश्वर तेली ऊपरी असम के एक कद्दावर नेता और ओबीसी (OBC) समुदाय के प्रमुख चेहरे के रूप में स्थापित हो चुके हैं। 2026 के विधानसभा चुनावों में दुलियाजान सीट से शानदार जीत दर्ज करने के बाद, उन्हें नई कैबिनेट में श्रम कल्याण, चाय जनजाति एवं आदिवासी कल्याण तथा परिवर्तन और विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे पहले वे केंद्र सरकार में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस तथा श्रम एवं रोजगार जैसे अहम मंत्रालयों में राज्य मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं।
रामेश्वर तेली की सबसे बड़ी खूबी उनका अपनी मूल संस्कृति के प्रति गहरा समर्पण है। आधुनिक राजनीति के उच्च शिखर पर होने के बावजूद वे अपनी बातचीत में छत्तीसगढ़ी बोली का माधुर्य बनाए रखते हैं। पारंपरिक ‘सुआ नाचा’ जैसे लोक नृत्यों के प्रति उनका लगाव जगजाहिर है, जो उन्हें जनता के बीच बेहद लोकप्रिय बनाता है। वे सही मायने में छत्तीसगढ़ और असम के बीच एक सांस्कृतिक राजदूत की भूमिका निभा रहे हैं। उनकी यह जीवन यात्रा छत्तीसगढ़ की माटी के उस जुझारूपन का जीवंत प्रतीक है, जो हजारों मील दूर जाकर भी अपनी पहचान और मेहनत के दम पर सफलता का परचम लहराने की क्षमता रखती है।

