Chhattisgarh Pattas Distribution 2026 : रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने शहरी क्षेत्रों में रहने वाले हजारों परिवारों के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश के विभिन्न नगरीय निकायों में साल 2017 से पहले सरकारी जमीन पर काबिज पात्र लोगों को सरकार अब मालिकाना हक (पट्टा) देने जा रही है। राजस्व विभाग ने इस संबंध में सभी जिला कलेक्टरों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
इस महत्वपूर्ण योजना के क्रियान्वयन के लिए जमीन का सर्वे शुरू हो गया है, जिसे 15 अगस्त 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
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15 अगस्त 2026 तक कलेक्टरों को देनी होगी रिपोर्ट
राजस्व विभाग के निर्देशों के अनुसार, सभी जिलों के कलेक्टरों को अपने-अपने क्षेत्रों में सर्वे का काम समय सीमा के भीतर पूरा करना होगा। सर्वे की पूरी रिपोर्ट संचालक भू-अभिलेख को भेजी जाएगी। इस रिपोर्ट के आधार पर ही पात्र हितग्राहियों की अंतिम सूची तैयार की जाएगी और फिर उन्हें मालिकाना हक के दस्तावेज (पट्टा) वितरित किए जाएंगे।
सर्वे के लिए बनीं संयुक्त टीमें
पट्टा वितरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने विशेष रणनीति बनाई है:
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संयुक्त सर्वे टीम: सर्वे कार्य के लिए नगर निगम और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें बनाई गई हैं।
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निरीक्षण का दायरा: यह टीमें घर-घर जाकर जमीन के कब्जे, पुराना रिकॉर्ड और पात्रता की जांच करेंगी।
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दस्तावेजों का सत्यापन: कब्जाधारियों को यह साबित करना होगा कि वे 2017 से पहले से उस जमीन पर काबिज हैं।
किसे मिलेगा मालिकाना हक? (पात्रता की शर्तें)
सरकार द्वारा तय किए गए मापदंडों के अनुसार, पट्टा केवल उन्हीं लोगों को मिलेगा जो शर्तें पूरी करेंगे:
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कब्जे की अवधि: आवेदक का संबंधित सरकारी भूमि पर वर्ष 2017 से पहले का कब्जा होना अनिवार्य है।
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पात्र श्रेणी: पट्टा केवल नगरीय निकायों के भीतर आने वाली उन जमीनों पर दिया जाएगा जो विवादित नहीं हैं।
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दस्तावेजी प्रमाण: बिजली बिल, राशन कार्ड या अन्य कोई सरकारी दस्तावेज जो 2017 से पहले की स्थिति स्पष्ट करता हो, उसे प्रमाण माना जा सकता है।
पट्टा मिलने से क्या होगा फायदा?
शहरी क्षेत्रों में रहने वाले गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए यह खबर किसी सौगात से कम नहीं है। पट्टा मिलने के बाद:
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कब्जे वाली जमीन पर कानूनी मालिकाना हक मिलेगा।
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लोग अपनी जमीन पर बैंक से लोन (ऋण) ले सकेंगे।
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प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में आसानी होगी।
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जमीन के अवैध होने का डर खत्म होगा और संपत्ति की वैल्यू बढ़ेगी।

