रायपुर। छत्तीसगढ़ी भाषा, लोकसंवेदना और साहित्यिक चेतना के उजास से आलोकित 26वें प्रांतीय छत्तीसगढ़ी साहित्य सम्मेलन में सृजनशीलता का अनुपम पर्व साकार हुआ। इस गरिमामयी अवसर पर शब्द-साधिका डॉ. मुक्ता कान्हा कौशिक को उनके विशिष्ट साहित्यिक अवदान के लिए ‘साहित्य प्रतिभा सम्मान’ से विभूषित किया गया।
सम्मेलन की अध्यक्षता प्रांतीय छत्तीसगढ़ी साहित्य समिति के अध्यक्ष कान्हा कौशिक ने की, जिनकी अध्यक्षीय उपस्थिति ने आयोजन को वैचारिक ऊंचाई प्रदान की। मुख्य अतिथि के रूप में रेड क्रॉस सोसाइटी, महासमुंद के सभापति संदीप दीवान की गरिमामयी उपस्थिति रही, जबकि विशेष अतिथि के रूप में पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी सोरीन सेन, महाप्रभु वल्लभाचार्य महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अनुसूया अग्रवाल सहित अनेक विद्वतजन मंचासीन रहे।
छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग रायपुर के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा के करकमलों से डॉ. मुक्ता कौशिक को शाल, प्रशस्ति-पत्र एवं स्मृति-चिह्न अर्पित कर सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके उस सतत साहित्यिक साधना का प्रतीक है, जिसके माध्यम से उन्होंने छत्तीसगढ़ी भाषा को वैश्विक पटल पर प्रतिष्ठित करने और स्थानीय साहित्यकारों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई है।
ग्रेसियस कॉलेज ऑफ एजुकेशन, अभनपुर में सह प्राध्यापक के रूप में कार्यरत डॉ. मुक्ता कौशिक की साहित्यिक यात्रा निरंतर उपलब्धियों से आलोकित रही है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्राप्त अनेक सम्मानों ने उनकी सृजनशीलता को और अधिक परिपक्वता प्रदान की है।
उनके इस सम्मान से साहित्यिक जगत में हर्ष और गौरव का वातावरण व्याप्त हो गया। इस अवसर पर प्रभात मिश्रा, कान्हा कौशिक, डॉ. हरिसिंह पाल, डॉ. शंभू पवार, डॉ. अनुसूया अग्रवाल, डॉ. शैलचंद्रा, डॉ. आशुतोष शुक्ला, डॉ. रिया तिवारी तथा डॉ. गोकुलेश्वर कुमार द्विवेदी सहित अनेक साहित्यकारों एवं शिक्षाविदों ने अपनी शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए इसे छत्तीसगढ़ी भाषा-साहित्य के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया।

