By यशवंत गंजीर धमतरी |
छत्तीसगढ़ के सहकारी ढांचे को आधुनिक बनाने और अन्नदाताओं को भंडारण की किल्लत से निजात दिलाने के लिए राज्य सरकार ने ‘मिशन मोड’ पर काम शुरू कर दिया है। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अध्यक्ष निरंजन सिन्हा की सक्रियता और अपेक्स बैंक की तत्परता से नाबार्ड सहायता योजना 2025 के तहत 63.9 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की गई है। इस निवेश से न केवल धान का सुरक्षित रखरखाव होगा, बल्कि समितियों का अपना सर्वसुविधायुक्त कार्यालय भी होगा।
छह जिलों की तस्वीर बदलेगी:
योजना के प्रथम चरण में धमतरी, रायपुर, महासमुंद, गरियाबंद, बलौदाबाजार और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों को शामिल किया गया है। चिन्हित 25 समितियों में से प्रत्येक को 25.56 लाख रुपये का बजट आवंटित किया गया है। इससे धमतरी के सिंगपुर-मड़ेली से लेकर रायपुर के खरोरा-अभनपुर और गरियाबंद के मैनपुर जैसे दूरस्थ अंचलों तक सहकारी तंत्र को नई ऑक्सीजन मिलेगी।
तकनीकी मजबूती और स्थानीय विकास:
स्वीकृत परियोजना के तहत हर समिति में 200 मीट्रिक टन क्षमता का गोदाम बनाया जाएगा। इसका सीधा लाभ खरीफ और रबी सीजन में खाद-बीज के अग्रिम भंडारण में मिलेगा। अधिकारियों का कहना है कि अब खुले में धान भीगने या भंडारण की कमी के कारण उपार्जन में होने वाली देरी जैसी समस्याओं का स्थाई समाधान हो सकेगा। यह कदम ग्रामीण विकास की दिशा में एक ‘गेम-चेंजर’ साबित होगा।
पारदर्शिता और सुविधा पर जोर:
इस निर्माण कार्य की खास बात यह है कि इसमें गोदाम के साथ कार्यालय भी संलग्न होगा। इससे किसानों को ऋण संबंधी कार्यों, पंजीयन और अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।
बैंक अध्यक्ष निरंजन सिन्हा के अनुसार, मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप सहकारिता को सीधे किसानों की समृद्धि से जोड़ने के लिए यह स्वीकृति एक मील का पत्थर है, जिसका काम जल्द ही धरातल पर शुरू कर दिया जाएगा।

