वाड्रफनगर। महिलाओं और बच्चों के पोषण की जिम्मेदारी संभालने वाले महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। वाड्रफनगर विकासखंड के मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र सुरहुल खास में 9 मासूम बच्चों को एक्सपायरी डेट का रेडी-टू-ईट फूड खिलाए जाने का मामला सामने आया है। इतना ही नहीं, केंद्र की जांच के दौरान 12 एक्सपायरी रेडी-टू-ईट फूड के पैकेट भी बरामद हुए। यह घटना न केवल विभागीय लापरवाही को उजागर करती है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करती है कि जिन मासूमों के बेहतर पोषण और स्वास्थ्य की जिम्मेदारी सरकार ने विभाग को सौंपी है, उनकी सुरक्षा आखिर किसके भरोसे है?
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मॉडल केंद्र में ही नियमों की अनदेखी
सबसे हैरानी की बात यह है कि यह घटना किसी सामान्य आंगनबाड़ी केंद्र की नहीं, बल्कि मॉडल आंगनबाड़ी केंद्र की है, जिसे अन्य केंद्रों के लिए आदर्श माना जाता है। ऐसे केंद्र में एक्सपायरी खाद्य सामग्री का रखा जाना और उसका बच्चों में वितरण होना यह साबित करता है कि विभाग की निगरानी व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित होकर रह गई है। यदि मॉडल केंद्र का यह हाल है तो दूर-दराज के अन्य आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।

कार्यकर्ता का जवाब और बढ़ा गया विवाद
मामले के सामने आने के बाद जब आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से एक्सपायरी फूड बांटने के संबंध में सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि “मुझे ठीक से दिखाई नहीं देता, इसलिए मैं एक्सपायरी डेट चेक नहीं कर पाई।” यह जवाब विभागीय जिम्मेदारी पर और भी गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि किसी कर्मचारी को पैकेट पर लिखी एक्सपायरी डेट तक पढ़ने में परेशानी है, तो फिर उसे बच्चों के पोषण की इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी कैसे सौंपी गई? और यदि ऐसी स्थिति थी, तो विभाग ने समय रहते कोई वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की?

निरीक्षण और मॉनिटरिंग व्यवस्था पर उठे सवाल
महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी समय-समय पर आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण करने और पोषण आहार की गुणवत्ता जांचने का दावा करते हैं। लेकिन सुरहुल खास की घटना ने इन दावों की पोल खोल दी है। यदि नियमित निरीक्षण हो रहे थे तो एक्सपायरी पैकेट केंद्र में पहुंचे कैसे? और यदि पहुंच भी गए थे तो उन्हें बच्चों तक बांटने से पहले हटाया क्यों नहीं गया? यह मामला साफ संकेत देता है कि विभागीय मॉनिटरिंग में कहीं न कहीं गंभीर चूक हुई है।

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मासूमों की सेहत से समझौता कितना उचित?
सरकार बच्चों में कुपोषण दूर करने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। रेडी-टू-ईट फूड का उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराना है, लेकिन यदि वही खाद्य सामग्री एक्सपायरी हो और उसे मासूमों को खिला दिया जाए, तो यह सीधे-सीधे उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। विशेषज्ञों के अनुसार एक्सपायरी खाद्य पदार्थ बच्चों में फूड प्वाइजनिंग, संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बन सकते हैं।

सवाल जिनका जवाब विभाग को देना होगा
एक्सपायरी रेडी-टू-ईट फूड आंगनबाड़ी केंद्र तक पहुंचा कैसे
12 एक्सपायरी पैकेट लंबे समय तक केंद्र में क्यों रखे रहे?
नियमित निरीक्षण करने वाले अधिकारियों ने इन्हें क्यों नहीं देखा?
क्या संबंधित पर्यवेक्षक और परियोजना अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होगी?
बच्चों की जान जोखिम में डालने वालों पर क्या कार्रवाई होगी?
जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
घटना सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी कर्मचारियों व जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि इस मामले में केवल खानापूर्ति की गई, तो भविष्य में भी ऐसी लापरवाही दोहराई जा सकती है।
सुरहुल खास का यह मामला केवल एक आंगनबाड़ी केंद्र की लापरवाही नहीं, बल्कि महिला एवं बाल विकास विभाग की निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। जब मॉडल केंद्र में ही एक्सपायरी पोषण आहार बच्चों को परोसा जा रहा है, तो यह व्यवस्था की गंभीर विफलता को दर्शाता है। अब देखना होगा कि विभाग इस मामले में केवल जांच का आश्वासन देता है या वास्तव में जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाता है।

