कुरुद। आज के डिजिटल दौर में जहाँ बच्चों का बचपन मोबाइल स्क्रीन की नीली रोशनी में सिमटता जा रहा है, वहीं कुरूद में एक अनूठी पहल उन्हें फिर से कल्पनाओं की सतरंगी दुनिया से जोड़ रही है। वर्ष 2018 से बसंत फाउंडेशन, छत्तीसगढ़ द्वारा संचालित “जीवन रंग आर्ट क्लास” अब केवल एक प्रशिक्षण केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव बन चुका है।
यहाँ की ख्याति अब केवल प्रदेश तक सीमित नहीं है; देश के विभिन्न हिस्सों से भी बच्चे पेंटिंग सीखने की जिज्ञासा लेकर कुरूद पहुँच रहे हैं। रंगों के माध्यम से बच्चों को न सिर्फ ब्रश चलाना सिखाया जा रहा है, बल्कि उनके व्यक्तित्व का समग्र विकास भी किया जा रहा है। संस्था के प्रशिक्षकों का स्पष्ट मानना है कि कला केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि धैर्य, अनुशासन और एकाग्रता विकसित करने का सबसे सशक्त साधन है।
आत्मविश्वास के रंग भरते बसंत साहू:
संस्थापक बसंत साहू के अनुसार, “हमारा उद्देश्य बच्चों को केवल चित्र बनाना सिखाना नहीं है, बल्कि उनके भीतर आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच के रंग भरना है।” यही कारण है कि यहाँ प्रशिक्षण ले रहे बच्चों के व्यवहार में उल्लेखनीय परिवर्तन देखने को मिल रहा है। वे पहले की तुलना में अधिक अनुशासित, रचनात्मक और आत्मनिर्भर बन रहे हैं। जो बच्चे पहले घंटों मोबाइल गेमिंग में बिताते थे, अब वे कैनवास पर अपनी भावनाओं को उकेरने में सुकून महसूस करते हैं।
आभासी दुनिया से वास्तविक सृजन की ओर:
“जीवन रंग आर्ट क्लास” बच्चों को अपनी कल्पनाओं को खुलकर व्यक्त करने का एक खुला मंच प्रदान करता है। इससे वे मोबाइल की आभासी दुनिया के जाल से बाहर निकलकर वास्तविक सृजन की ओर अग्रसर हो रहे हैं। इस बदलाव को देखकर अभिभावकों में भी जागरूकता बढ़ी है। अब वे समझ रहे हैं कि बच्चों को महंगे गैजेट्स देने के बजाय उन्हें ऐसी रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना कहीं अधिक महत्वपूर्ण है जो उनके मानसिक विकास में सहायक हों।
एक सामाजिक आंदोलन की आहट:
बसंत फाउंडेशन की यह पहल अब धीरे-धीरे एक सामाजिक आंदोलन का रूप लेती जा रही है। यह समाज को यह कड़ा संदेश देती है कि आने वाली पीढ़ी को सिर्फ आधुनिक तकनीक की नहीं, बल्कि सृजन के अवसरों और संस्कारों की भी उतनी ही आवश्यकता है। कुरूद से उठी यह रंगीन लहर आने वाली पीढ़ी को आत्मविश्वास और रचनात्मकता से लबरेज करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हो रही है।



