By-Degital Desk
बलरामपुर जिले के रामानुजगंज विकासखंड में पशु चिकित्सा विभाग एक बार फिर विवादों में घिर गया है। विभाग पर भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के गंभीर आरोप लगे हैं, जिनसे स्थानीय स्तर पर आक्रोश का माहौल बन गया है। ताजा मामला एक वायरल ऑडियो क्लिप के जरिए सामने आया है, जिसमें विभागीय कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।(BALRAMPUR BREAKING)

वायरल ऑडियो में कमीशन मांगने का आरोप
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, विकासखंड रामानुजगंज में पदस्थ कंपाउंडर बी.वी. गुप्ता पर एक गौ-सेवक से कमीशन मांगने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि यह ऑडियो क्लिप तेजी से वायरल हो रही है, जिसमें कंपाउंडर कथित तौर पर देव कुमार नामक गौ-सेवक से उसके मानदेय में से 15 प्रतिशत हिस्सा देने की बात कह रहा है।
ऑडियो में यह भी सुनाई देता है कि अन्य गौ-सेवक पहले ही अपना हिस्सा दे चुके हैं और अब देव कुमार को भी भुगतान मिलने के बाद निर्धारित प्रतिशत देना होगा। बातचीत में “डॉक्टर साहब” के लिए हिस्सा देने की बात कही गई है, जिससे मामले ने और गंभीर रूप ले लिया है।

वरिष्ठ अधिकारी पर संरक्षण के आरोप
इस पूरे मामले में पशु चिकित्सक डॉ. सर्वेंद्र सिंह सेंगर का नाम भी सामने आया है। स्थानीय लोगों और कार्यकर्ताओं का आरोप है कि वे पिछले लगभग 25 वर्षों से इसी विकासखंड में पदस्थ हैं। लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थ रहने के कारण उनके प्रभाव और पकड़ को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
आरोप है कि उनके संरक्षण में विभाग में कार्यरत निजी गौ-सेवकों और कृत्रिम गर्भाधान (AI) कार्यकर्ताओं पर आर्थिक दबाव बनाया जाता है। बिना कमीशन दिए किसी भी कार्यकर्ता का भुगतान समय पर नहीं किया जाता, जिससे कार्यकर्ताओं को मानसिक और आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।
गौ-सेवकों और AI कार्यकर्ताओं में नाराजगी
रामानुजगंज विकासखंड के गौ-सेवकों और AI कार्यकर्ताओं में इस कथित व्यवस्था को लेकर भारी नाराजगी देखी जा रही है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे दिन-रात मेहनत कर पशुपालन विभाग की योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाते हैं, लेकिन अंत में उनकी मेहनत की कमाई का बड़ा हिस्सा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाता है।
कई कार्यकर्ताओं ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह कोई नया मामला नहीं है, बल्कि लंबे समय से इस तरह की प्रथा चली आ रही है। वे मजबूरी में इस व्यवस्था को सहन कर रहे हैं, क्योंकि विरोध करने पर काम बंद होने या भुगतान रोकने का डर बना रहता है।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
पीड़ित कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि वायरल ऑडियो की सत्यता की जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।
साथ ही, उन्होंने यह भी मांग की है कि लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारियों का स्थानांतरण किया जाए, ताकि विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सामूहिक रूप से आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं।
विभागीय छवि पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने पशु चिकित्सा विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर सरकार पशुपालन को बढ़ावा देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर ऐसे आरोप योजनाओं की प्रभावशीलता पर प्रश्नचिह्न लगाते हैं।(BALRAMPUR BREAKING)
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या वास्तव में जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होती है या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाता है।
वायरल आडियो

