By- Degital Desk
बलरामपुर -ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार द्वारा चलाई जा रही धरती आबा ग्रामीण उत्कर्ष योजना बलरामपुर जिले में विभागीय खींचतान और प्रशासनिक सुस्ती का शिकार हो गई है।
करीब 19 करोड़ रुपये की लागत से 9 छात्रावास निर्माण की मंजूरी दी गई थी, लेकिन हालात यह हैं कि अब तक एक भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है।Balrampur News
कैसे शुरू हुआ मामला
शासन ने राशि शिक्षा विभाग को जारी की
मई 2025 में 7 करोड़ की पहली किश्त हाउसिंग बोर्ड को दी गई
टेंडर प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन बारिश का हवाला देकर काम टाल दिया गया

बीच में बदली गई एजेंसी
काम की धीमी रफ्तार को देखते हुए कलेक्टर ने निर्माण एजेंसी बदल दी और काम CMGSY विभाग को सौंप दिया।

👉 यहीं से विवाद शुरू हुआ:
हाउसिंग बोर्ड के पास 7 करोड़ रुपये अब भी अटके
शिक्षा विभाग के पत्राचार के बावजूद राशि वापस नहीं
नई एजेंसी के पास फंड नहीं, पुरानी एजेंसी के पास पैसा फंसा

👉 नतीजा: करीब एक साल से पूरा प्रोजेक्ट ठप
सबसे बड़ा सवाल
- सड़क बनाने वाली एजेंसी को भवन निर्माण क्यों?
- हाउसिंग बोर्ड भवन निर्माण में विशेषज्ञ
- CMGSY सड़कों के लिए जाना जाता है
👉 फैसले पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं
👤 एक अधिकारी, तीन विभाग
जिले में स्थिति और भी चौंकाने वाली:
RES
PMGSY
CMGSY
👉 तीनों विभागों का प्रभार एक ही कार्यपालन अभियंता के पास
इससे निगरानी और जवाबदेही दोनों पर सवाल उठ रहे हैं
पहले भी उठ चुके हैं सवाल
- शाला जतन योजना में गुणवत्ता पर सवाल
- चेक डैम निर्माण में अनियमितता
- ग्रामीण सड़क निर्माण में घटिया काम की शिकायतें
आखिर जिम्मेदार कौन?
छात्रावास निर्माण कब शुरू होगा?
फंसी हुई राशि कब वापस आएगी?
निर्माण एजेंसी कौन तय होगी?
👉क्या यह योजना भी कागजों में ही रह जाएगी?
सरकार की मंशा ग्रामीण शिक्षा को मजबूत करने की है, लेकिन बलरामपुर में प्रशासनिक लापरवाही और विभागीय विवाद इस योजना को पटरी से उतारते नजर आ रहे हैं।
अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस मामले को गंभीरता से लेते हैं या
19 करोड़ की योजना फाइलों में ही दम तोड़ देगी।
