By-Kuleshwar Kuswaha
बलरामपुर -शंकरगढ़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले डूमरपानी गांव से एक बेहद चिंताजनक और मानवता को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है। यहां चोरी के शक में ग्रामीणों ने एक युवक को कथित तौर पर “तालिबानी सजा” देते हुए उसकी बेरहमी से पिटाई कर दी। इस दौरान युवक के साथ न सिर्फ मारपीट की गई, बल्कि उसके सिर के बालों के कुछ हिस्से भी उखाड़ दिए गए और उसके कपड़े तक फाड़ दिए गए। घटना के बाद युवक गंभीर रूप से घायल हो गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, युवक पर गांव के कुछ लोगों ने सरसों और करीब 300 रुपये नगद चोरी करने का आरोप लगाया था। हालांकि, यह आरोप अभी तक प्रमाणित नहीं हुआ है, लेकिन ग्रामीणों ने बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के खुद ही सजा देने का फैसला कर लिया। यही फैसला युवक के लिए जानलेवा साबित हो सकता था।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, घटना के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हो गए थे। भीड़ ने पहले युवक को पकड़कर बीच गांव में लाया और फिर उस पर हमला शुरू कर दिया। कुछ लोगों ने उसे लाठियों और हाथों से पीटा, जबकि कुछ ने उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया। युवक लगातार अपनी सफाई देता रहा, लेकिन भीड़ पर इसका कोई असर नहीं पड़ा।

इस दौरान युवक के सिर के बालों के कुछ हिस्से भी जबरन उखाड़ दिए गए, जिससे उसे गहरी चोटें आईं। इतना ही नहीं, उसके कपड़े भी फाड़ दिए गए, जिससे उसकी गरिमा को भी ठेस पहुंची। घटना के बाद युवक की हालत बिगड़ गई और वह गंभीर रूप से घायल हो गया।
घटना की सूचना मिलने के बाद शंकरगढ़ थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने घायल युवक को तत्काल उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उसका इलाज जारी है। डॉक्टरों के अनुसार, युवक के शरीर पर कई गंभीर चोटों के निशान हैं और उसकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
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पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी गई है। शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि युवक पर चोरी का केवल शक था, जिसकी कोई ठोस पुष्टि नहीं हुई थी। इसके बावजूद ग्रामीणों ने कानून को अपने हाथ में लेते हुए इस तरह की हिंसक घटना को अंजाम दिया।

पुलिस अब इस मामले में शामिल लोगों की पहचान करने में जुटी है। वीडियो फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों ने साफ कहा है कि किसी भी व्यक्ति को कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
यह घटना न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि समाज में बढ़ती भीड़तंत्र की प्रवृत्ति को भी उजागर करती है। मामूली चोरी के शक में इस तरह की सजा देना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि यह मानवाधिकारों का भी गंभीर उल्लंघन है।
स्थानीय प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें और खुद कोई कदम न उठाएं। कानून का पालन करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है और इस तरह की घटनाएं समाज में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा करती हैं।
फिलहाल, पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है और जल्द ही आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं, घायल युवक के स्वस्थ होने के लिए डॉक्टर लगातार प्रयास कर रहे हैं।
यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर कब तक लोग कानून को अपने हाथ में लेते रहेंगे और कब समाज में न्याय की सही प्रक्रिया का सम्मान किया जाएगा।
