बलरामपुर
जनपद पंचायत कुसमी के प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) मुन्नालाल ध्रुवे को लेकर विभिन्न समाचार माध्यमों और सोशल मीडिया पर प्रकाशित खबरों के बाद आदिवासी विकास विभाग ने स्थिति स्पष्ट की है। विभाग ने कहा है कि उन्हें संलग्नीकरण (Attachment) के आधार पर नहीं, बल्कि प्रतिनियुक्ति व्यवस्था और प्रशासनिक प्रभार के तहत यह जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सोशल मीडिया में चली थी भ्रामक खबर
हाल ही में कुछ समाचारों और सोशल मीडिया पोस्ट में यह दावा किया गया था कि स्कूल शिक्षा विभाग में संलग्नीकरण समाप्त होने के बावजूद एक प्रधान पाठक को जनपद पंचायत कुसमी के प्रभारी सीईओ का प्रभार दे दिया गया है। इस पर सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग ने तथ्यात्मक जानकारी जारी कर स्थिति स्पष्ट की।
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शासन के आदेश का दिया हवाला
सहायक आयुक्त के अनुसार, राज्य शासन के आदेश के तहत आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के आश्रम-शालाओं में कार्यरत अधीक्षक सह प्रधान पाठक का पदनाम अब केवल प्रधान पाठक होगा तथा इन स्कूलों का संचालन स्कूल शिक्षा विभाग को हस्तांतरित किया जा रहा है।
हालांकि, जिन आश्रम-शालाओं में अधीक्षक का पृथक पद स्वीकृत है और जहां भर्ती प्रक्रिया अभी जारी है, वहां नियमित नियुक्ति होने तक वर्तमान में कार्यरत अधिकारी को अधीक्षक के पद पर प्रतिनियुक्ति या प्रभार के रूप में कार्यरत माना जाएगा।

पहले क्षेत्र संयोजक, फिर मिला सीईओ का प्रभार
विभाग के अनुसार, मुन्नालाल ध्रुवे पहले अधीक्षक के पद पर कार्यरत थे। इसके बाद 24 फरवरी 2025 को आयुक्त, आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास, इंद्रावती भवन, नवा रायपुर द्वारा उन्हें बलरामपुर कार्यालय में प्रभारी क्षेत्र संयोजक के रूप में पदस्थ किया गया।
बाद में प्रशासनिक व्यवस्था के तहत उन्हें जनपद पंचायत कुसमी के प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) का अतिरिक्त प्रभार आगामी आदेश तक सौंपा गया।
वेतन आजाक विभाग से ही मिल रहा
सहायक आयुक्त ने स्पष्ट किया कि मुन्नालाल ध्रुवे स्कूल शिक्षा विभाग में संलग्न नहीं थे। वे संलग्नीकरण समाप्त होने से पहले ही आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग (आजाक विभाग) में प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं। उनका वेतन एवं अन्य भत्तों का भुगतान भी वर्तमान में आजाक विभाग द्वारा ही किया जा रहा है।
विभाग ने किया स्थिति स्पष्ट
विभाग का कहना है कि मुन्नालाल ध्रुवे को जनपद पंचायत कुसमी का प्रभार पूरी तरह प्रशासनिक व्यवस्था के तहत दिया गया है। इसलिए इसे संलग्नीकरण समाप्त होने के बाद की नियुक्ति या नियमों के उल्लंघन के रूप में प्रस्तुत करना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है।


