बलरामपुर जिले के राजपुर स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय में आयोजित शाला प्रवेश उत्सव कार्यक्रम के दौरान उस समय माहौल गर्म हो गया, जब क्षेत्रीय विधायक उद्देश्वरी पैकरा मंच की व्यवस्थाओं को लेकर नाराज हो गईं। कार्यक्रम के बीच ही उन्होंने मंच के सामने रखे गए नेमप्लेट (नेम बोर्ड) को स्वयं उठाकर किनारे कर दिया और अधिकारियों को व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए। इस दौरान मंच पर मौजूद जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच कुछ देर के लिए असहज स्थिति भी बन गई।
बैठक व्यवस्था पर उठाए सवाल …
जानकारी के अनुसार कार्यक्रम में मंच पर वरिष्ठ एवं कनिष्ठ जनप्रतिनिधियों की बैठक व्यवस्था को लेकर विधायक ने आपत्ति जताई। उनका कहना था कि प्रोटोकॉल और वरिष्ठता का ध्यान रखते हुए मंच की व्यवस्था की जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इसी बात को लेकर उन्होंने नाराजगी व्यक्त की और संबंधित अधिकारियों से जवाब भी मांगा।
भाजपा पदाधिकारियों ने भी जताई नाराजगी….
कार्यक्रम में मौजूद भाजपा संगठन के जिला महामंत्री एवं जिला कोषाध्यक्ष ने भी मंच की व्यवस्था को लेकर असंतोष जताया। उनका कहना था कि सार्वजनिक कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों और संगठन के पदाधिकारियों की गरिमा के अनुरूप बैठक व्यवस्था होना आवश्यक है। उचित समन्वय नहीं होने के कारण कार्यक्रम के दौरान अनावश्यक स्थिति उत्पन्न हुई।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों को लगी फटकार….
मंच व्यवस्था में हुई अव्यवस्था को लेकर विधायक उद्देश्वरी पैकरा ने सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी (एबीईओ) सहित शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारियों को मौके पर ही फटकार लगाई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही दोबारा नहीं होनी चाहिए और सरकारी कार्यक्रमों के आयोजन में प्रोटोकॉल तथा व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा जाए।
कार्यक्रम के दौरान बना चर्चा का विषय…
विधायक की नाराजगी और मंच पर हुई इस घटना की चर्चा पूरे कार्यक्रम के दौरान होती रही। कुछ देर तक आयोजन का माहौल प्रभावित रहा, हालांकि बाद में अधिकारियों ने स्थिति संभाली और कार्यक्रम आगे बढ़ाया गया। शाला प्रवेश उत्सव के तहत विद्यार्थियों का स्वागत किया गया तथा शिक्षा से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।
व्यवस्था को लेकर उठे सवाल..
घटना के बाद कार्यक्रम की तैयारियों और मंच संचालन को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण सरकारी कार्यक्रम में यदि पहले से समुचित समन्वय किया गया होता तो इस तरह की स्थिति उत्पन्न नहीं होती। वहीं, शिक्षा विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर भी चर्चा तेज हो गई है।फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो और तस्वीरें भी चर्चा का विषय बनी हुई हैं। हालांकि, शिक्षा विभाग की ओर से इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

