क्रिकेट का वो अनोखा सच— भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच हमेशा से ही रोमांच और भावनाओं से भरा रहा है। आज भले ही दोनों देशों के बीच मुकाबले केवल आईसीसी टूर्नामेंट या एशिया कप में ही देखने को मिलते हैं, लेकिन क्रिकेट इतिहास में एक ऐसा दौर भी था जब कुछ खिलाड़ियों ने इन दोनों ही देशों की जर्सी पहनी। विभाजन के पहले और बाद के दौर में तीन ऐसे क्रिकेटर रहे, जिन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में भारत और पाकिस्तान दोनों टीमों का प्रतिनिधित्व किया।

अब्दुल हफीज कारदार: जिन्हें माना गया पाकिस्तान क्रिकेट का जनक
इस सूची में सबसे पहला और बड़ा नाम अब्दुल हफीज कारदार का है। उन्हें पाकिस्तान में ‘फादर ऑफ क्रिकेट’ यानी क्रिकेट का जनक माना जाता है। कारदार ने साल 1946 में भारतीय टीम के साथ अपने टेस्ट करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने अविभाजित भारत की तरफ से इंग्लैंड के दौरे पर 3 टेस्ट मैच खेले। विभाजन के बाद वह पाकिस्तान चले गए और वहां की टीम के पहले कप्तान बने। कारदार की कप्तानी में पाकिस्तान ने अपने शुरुआती दौर में भारत, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी मजबूत टीमों को टेस्ट मैचों में शिकस्त दी थी।
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अमीर इलाही: भारत के लिए पहला टेस्ट और पाकिस्तान के लिए आखिरी मुकाबला
दूसरे खिलाड़ी अमीर इलाही हैं, जो एक बेहतरीन लेग स्पिनर थे। अमीर इलाही ने साल 1947 में सिडनी में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत के लिए अपना पहला टेस्ट मैच खेला था। देश के विभाजन के बाद अमीर इलाही ने पाकिस्तान का रुख किया। पाकिस्तान को साल 1952 में जब टेस्ट टीम का दर्जा मिला, तब इलाही पाकिस्तान की टीम का हिस्सा बने। उन्होंने पाकिस्तान के लिए 5 टेस्ट मैच खेले और दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच भारत के खिलाफ ही खेला था।
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गुल मोहम्मद: दोनों देशों के लिए खेलने वाले आक्रामक बल्लेबाज
इस सूची के तीसरे क्रिकेटर गुल मोहम्मद हैं। वह एक आक्रामक खब्बू बल्लेबाज और शानदार फील्डर थे। गुल मोहम्मद ने साल 1946 से 1952 के बीच भारत के लिए कुल 8 टेस्ट मैच खेले। उन्होंने 1947-48 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भारतीय टीम की तरफ से शानदार प्रदर्शन किया था। बाद में साल 1955 में उन्होंने पाकिस्तान की नागरिकता ले ली। गुल मोहम्मद ने साल 1956 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कराची टेस्ट में पाकिस्तान की तरफ से अपना एकमात्र मैच खेला, जिसमें पाकिस्तान को जीत मिली थी।
इन तीनों खिलाड़ियों का नाम क्रिकेट की किताबों में हमेशा के लिए दर्ज हो चुका है। वर्तमान समय में क्रिकेट के नियम और दोनों देशों के बीच के राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए इस तरह के रिकॉर्ड का दोबारा बनना नामुमकिन है। यही वजह है कि अब्दुल हफीज कारदार, अमीर इलाही और गुल मोहम्मद का यह सफरनामा खेल प्रेमियों के लिए हमेशा कौतूहल का विषय बना रहता है।

