चंदौली। जनपद के चकिया थाना क्षेत्र में सपा नेता महेंद्र राव व अन्य पर दर्ज मुकदमे को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महेंद्र राव उर्फ महेंद्र कुमार राव समेत याचिकाकर्ताओं को महत्वपूर्ण अंतरिम राहत प्रदान की है। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया मामले में ठोस आधार न पाते हुए याचिकाकर्ताओं के विरुद्ध किसी भी प्रकार की जबरन कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह एवं न्यायमूर्ति सत्य वीर सिंह की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि रिकॉर्ड पर उपलब्ध तथ्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया मामला बनता हुआ नहीं दिखाई देता। न्यायालय ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि एफआईआर में 21 नामजद और 100 अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध लगाए गए आरोप अत्यंत सामान्य और अस्पष्ट प्रकृति के हैं।
अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि याचिकाकर्ताओं की ओर से यह तर्क दिया गया है कि आरोपों को काफी हद तक बढ़ा-चढ़ाकर और काल्पनिक रूप में प्रस्तुत किया गया है। न्यायालय ने आदेश में दर्ज किया कि एफआईआर के आरोपों के समर्थन में कोई गंभीर चोट या ऐसा ठोस साक्ष्य तत्काल दृष्टिगत नहीं होता जिससे अभियोजन की कार्रवाई को उचित ठहराया जा सके।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा गया जिस पर कोर्ट ने दो सप्ताह का समय प्रदान किया। वहीं याचिकाकर्ताओं को प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया गया है।
हाईकोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई या चार्जशीट दाखिल होने तक जो भी पहले हो याचिकाकर्ताओं के विरुद्ध कोई भी coercive action (गिरफ्तारी या अन्य जबरन कार्रवाई) नहीं की जाएगी बशर्ते वे जांच में सहयोग करते रहें।
गौरतलब है कि चकिया थाने में दर्ज इस मुकदमे में भारतीय वन अधिनियम 1927, क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट, 1932 तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई थी। हाईकोर्ट के इस आदेश को याचिकाकर्ताओं के लिए बड़ी कानूनी राहत माना जा रहा है।

